झारखंड

आईआईटी-आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह के तीसरे दिन पर्यावरण संरक्षण और सतत ऊर्जा पर चर्चा

अम्बर कलश तिवारी/न्यूज11  भारत

धनबाद/डेस्क:  आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह के तीसरे दिन 2nd नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स इन वेस्ट मैनेजमेंट: चैलेंजेज एंड अपॉर्च्युनिटीज (TAWMCO-2025) का शुभारंभ आज पेनमेन ऑडिटोरियम में हुआ। दिन का मुख्य विषय पर्यावरण संरक्षण और सतत नवीकरणीय ऊर्जा रहा, जिसके तहत देश-विदेश के विशेषज्ञों ने वेस्ट मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी पर अपने विचार रखे।

उद्घाटन सत्र में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के CMD श्री संजीव कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे, जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव श्री डी. एस. मिश्रा और डबलिन सिटी यूनिवर्सिटी (आयरलैंड) के प्रो. विजय के. गुप्ता सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सत्र की अध्यक्षता आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की।

शुरुआत में प्रो. विपिन कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद प्रो. आलोक सिन्हा ने कार्यक्रम के उद्देश्य साझा किए। निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि 100 साल पूरे करने के साथ संस्थान अब अपने “वयस्क चरण” में प्रवेश कर रहा है, जहाँ समाज की अपेक्षाएँ और भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च, नवाचार और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने वाले नए विचारों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि TEXMi और GCRP जैसी पहलें संस्थान की शोध पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर रही हैं।

सम्मानित अतिथि प्रो. विजय के. गुप्ता ने कहा कि कचरा किसी समस्या का नाम नहीं, बल्कि एक बड़ी संभावनाओं वाली संपत्ति है, जिससे ऊर्जा, बायो-फ्यूल, बायो-मटेरियल और कई महत्त्वपूर्ण उत्पाद बनाए जा सकते हैं। उन्होंने दुनिया के कई उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्नत टेक्नोलॉजी, AI-आधारित सॉर्टिंग और रिसर्च प्लेटफॉर्म वेस्ट वैलोराइजेशन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्य अतिथि शसंजीव कुमार सिंह ने बताया कि कॉपर भारत की प्रगति में बेहद जरूरी धातु है, जो पूरी तरह रीसायकल हो सकती है और देश के ऊर्जा, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की रीढ़ है। उन्होंने हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के प्रयासों—जैसे टेलिंग्स मैनेजमेंट, रिसाइक्लिंग, वेस्ट प्रोसेसिंग और उद्योग-शिक्षा सहयोग—पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माइनिंग वेस्ट को अवसर में बदलने की भारी संभावना है। उन्होंने भारत के 2047 लक्ष्य में HCL की पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई।

सम्मानित अतिथि श्री डी. एस. मिश्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर वेस्ट मैनेजमेंट पर फोकस तेजी से बढ़ रहा है और भारत में स्वच्छ भारत मिशन के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने Reduce–Reuse–Recycle की सोच अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति कोई कचरा नहीं बनाती, इंसान बनाता है, इसलिए हमें प्लास्टिक और अन्य वेस्ट को जिम्मेदारी से संभालना होगा और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल अपनाने होंगे।

दिनभर परिसर में कई कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिनमें कंप्यूटर साइंस, मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, फिजिक्स विभागों की प्लेनरी टॉक्स, डिस्कशन, और सक्सेस स्टोरीज़, AI-आधारित डिजिटल ट्विन डैशबोर्ड का लाइव डेमो, चिल्ड्रन एक्टिविटी सेंटर की गतिविधियाँ, स्कोलोमिन क्लब के कार्यक्रम और मंथन क्लब की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। कार्यक्रम का समापन प्रो. मनोज कुमार जैन के धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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