मध्य प्रदेश के 41 जिले अब भी पर्याप्त बारिश का इंत

आसमान में बादल, धरती पर प्यास: मानसून की सुस्ती से मध्य प्रदेश के 41 जिले प्रभावित, किसानों की बढ़ी चिंता

फाइल

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल थमी हुई है, जिससे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। जून माह समाप्त होने को है, लेकिन प्रदेश के 41 जिले अब भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं और खरीफ फसलों की बुआई पर भी असर पड़ने लगा है।मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और इसके बाद प्रदेश के शेष हिस्सों में भी बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना है।

प्रदेश में सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश

मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य से 39 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि भोपाल, इंदौर, देवास और आगर मालवा जैसे कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, लेकिन अधिकांश जिलों में वर्षा की भारी कमी बनी हुई है।विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां कुल मिलाकर सामान्य से 68 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में सूखे जैसे हालात

कुछ प्रमुख जिलों में बारिश की कमी:

  • टीकमगढ़ : 86 प्रतिशत कम

  • नरसिंहपुर : 83 प्रतिशत कम

  • कटनी : 79 प्रतिशत कम

  • जबलपुर : 78 प्रतिशत कम

  • बालाघाट : 78 प्रतिशत कम

  • दमोह : 77 प्रतिशत कम

  • रीवा : 76 प्रतिशत कम

  • पन्ना : 74 प्रतिशत कम

  • सिंगरौली : 73 प्रतिशत कम

  • मंडला : 72 प्रतिशत कम

  • अनूपपुर : 72 प्रतिशत कम

पांढुर्णा को छोड़कर लगभग सभी जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत से अधिक कम बारिश दर्ज की गई है।

बुंदेलखंड, विंध्य और ग्वालियर-चंबल में बढ़ी चिंता

बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी नहीं बन पा रही है, जिससे खरीफ सीजन की बुआई प्रभावित होने लगी है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई:

जिला

सामान्य से अधिक बारिश

आगर मालवा

51% अधिक

देवास

51% अधिक

भोपाल

44% अधिक

इंदौर

42% अधिक

नीमच

51% अधिक

इसके बावजूद कई पश्चिमी जिलों में भी बारिश की भारी कमी बनी हुई है।

अलीराजपुर में सबसे खराब स्थिति

अलीराजपुर जिले में जून माह के दौरान लगभग सूखे जैसी स्थिति बनी रही। यहां सामान्य से 98 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा भिंड, दतिया, झाबुआ, रतलाम, धार और हरदा जैसे जिलों में भी वर्षा का बड़ा घाटा रिकॉर्ड किया गया है।

अगले कुछ दिनों में सक्रिय हो सकता है मानसून

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून अगले दो-तीन दिनों में फिर सक्रिय हो सकता है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के नए इलाकों में इसकी प्रगति होने की संभावना है।रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। मंदसौर और रतलाम में तेज बारिश हुई, जबकि गुना, श्योपुर, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर, उज्जैन और छतरपुर सहित कई जिलों में अच्छी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

खरीफ फसलों के लिए अहम होगा जुलाई का महीना

प्रदेश के लाखों किसान अब जुलाई की बारिश पर निगाह लगाए हुए हैं। कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय होता है तो बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और खरीफ फसलों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि मानसून की सुस्ती जारी रही तो खेती-किसानी पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।