भोपाल। मप्र सरकार के काम पर कर्मचारी की कमी का असर

मप्र में 58 प्रतिशत सरकारी पद खाली, 42 फीसदी से चल रहा काम

मप्र में 58 प्रतिशत सरकारी पद खाली, 42 फीसदी से चल रहा काम 

प्रदेश सरकार ने कोर्ट में रखे आंकड़े

प्राइम न्यूज नेटवर्क

भोपाल। मप्र सरकार के काम पर कर्मचारी की कमी का असर होने लगा है। प्रदेश में जितने पद स्वीकृत हैं उसमें से 58 फीसदी अभी खाली हैं। इसका मतलब है कि  42 फीसदी अधिकारी  और कर्मचारी ही सरकारी ढांचा को चला रहे हैं। यह खुलासा सरकार द्वारा कोर्ट में रखे आकड़ों से होता है।

मालूम हो कि बीते डेढ़ दशक से भर्ती प्रक्रियायां धीमी हो गई है इससे विभागों में कार्यरत कर्मचारियों पर बहुत अधिक दबाव बढ़ गया है। कई विभाग ऐसे हैं जहाँ एक ही कर्मचारी को कई जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ रही हैं। इसका सीधा प्रभाव जनता से जुड़े प्रशासनिक और विकास कार्यों पर पड़ रहा है।

सरकार ने कोर्ट में बताया कि ग्रेड-1, ग्रेड-2 और सहायक पदों में बड़े पैमाने पर रिक्तियाँ हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2021 के मुताबिक मध्यप्रदेश में कुल सरकारी पदों का 52 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के लिए आरक्षित है, लेकिन इन आरक्षित पदों में से भी अधिकांश खाली हैं।

वर्ष 2008 के बाद से राज्य में भर्तियों की रफ्तार कम हो गई । सरकारी विभागों के आँकड़े बताते हैं कि लगभग 29 हजार से अधिक पद काफी समय से खाली हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि इस समय 1.04 लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं। भर्ती सीमाओं और वित्तीय स्वीकृतियों की कमी के कारण नई नियुक्तियाँ समय पर नहीं हो पा रही हैं।

प्रशासनिक जानकारों कहते हैं, इतनी बड़ी संख्या में पद खाली रहने से शासन की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई बार विभागों को तात्कालिक समाधान के रूप में संविदा कर्मचारियों या आउटसोर्सिंग का सहारा लेना पड़ता है। इससे दीर्घकालिक स्थायित्व पर सवाल खड़े होते हैं।

कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण नीति लागू है। पर वास्तविकता यह है कि इन वर्गों के लिए आरक्षित पदों में से भी एक बड़ा हिस्सा रिक्त है। सरकार के अनुसार, 20 प्रतिशत से अधिक पद आरक्षित श्रेणी में लंबे समय से खाली हैं। इस स्थिति पर अदालत ने भी चिंता व्यक्त की है और शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

सीमित मानव संसाधन के बावजूद कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ रही हैं। कई विभागों में एक अधिकारी को दो-तीन पदों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। विशेषज्ञों बताते हैं कि यदि समय पर नई भर्ती नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में सरकारी तंत्र की कार्यकुशलता और घट सकती है।

राज्य सरकार के अनुसार विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और अगले वित्तीय वर्ष तक कई पदों को भरने की योजना है।