मऊगंज में ‘कागजी गौशाला’ का खेल! अधूरी गौशाला में 611 गायें दिखाकर 59 लाख भुगतान का आरोप
मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले से सरकारी योजनाओं में कथित गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। हनुमना जनपद पंचायत के बेलहा गांव में निर्माणाधीन शासकीय गौशाला को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बिना पूरी तरह तैयार हुए ही कागजों में सैकड़ों गौवंश दिखाकर लाखों रुपए की राशि जारी कर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों में बड़ा अंतर है।
59 लाख से ज्यादा राशि पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बेलहा की गौशाला का निर्माण अभी अधूरा है और इसे पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं। इसके बावजूद गौवंश के चारे, भूसे और देखरेख के नाम पर कुल 59 लाख 42 हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस समय राशि निकाली गई, उस दौरान मौके पर पर्याप्त संख्या में गौवंश मौजूद नहीं थे।
RTI से सामने आई जानकारी
मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव के एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी। पशुपालन विभाग से मिले जवाब में बताया गया था कि गौशाला का संचालन स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है और अनुदान राशि जारी नहीं हुई है। इसके बाद ही बड़ी रकम जारी होने को लेकर सवाल खड़े हो गए।
जांच में भी सामने आई गड़बड़ी
ग्रामीणों की शिकायतों के बाद अधिकारियों ने जांच की। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान निर्माणाधीन गौशाला में एक समय एक भी गौवंश नहीं मिला था। बाद में निरीक्षण में केवल 22 गायें मिलने की बात सामने आई, जबकि पोर्टल पर 611 गौवंश दर्ज बताए गए।
जिम्मेदारी पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जिन लोगों पर पहले गौशाला निर्माण में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, उन्हीं को संचालन की जिम्मेदारी कैसे दी गई। वहीं, पूरे मामले में प्रशासन और पशुपालन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब इस कथित फर्जीवाड़े के बाद कार्रवाई और जांच का इंतजार है।