एमपी में पदोन्नति प्रक्रिया पर घमासान, नियमों की अनदेखी के आरोप
मध्य प्रदेश में करीब दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया अब विवादों में घिर गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमों की अनदेखी और उनकी गलत व्याख्या करने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। कमर्शियल टैक्स विभाग के बाद अब गृह विभाग के अधिकारियों ने भी पदोन्नति नियम-2025 के पालन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। अधिकारियों ने गृह विभाग की सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
हजारों अधिकारी पदोन्नति से वंचित होने का दावा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमों के अनुरूप पदोन्नति नहीं होने से सामान्य वर्ग तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हजारों कर्मचारी और अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए हैं। उनका आरोप है कि पात्र अधिकारियों की वरिष्ठता और पात्रता की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से पदोन्नति आदेश जारी किए गए। प्रभावित अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।
पुलिस विभाग की पदोन्नति पर सबसे ज्यादा विवाद
सरकार के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक करीब 25 हजार पदोन्नतियां पुलिस विभाग में की गई हैं, जिसकी मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक मंचों से सराहना कर चुके हैं। लेकिन अब इसी विभाग के कई अधिकारी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि विभाग अपनी गलती स्वीकार करने के बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई नहीं कर रहा है, इसलिए वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
नियमों के पालन और समीक्षा की मांग
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि वर्ष 2025 की विशेष डीपीसी में निर्धारित गोपनीय चरित्रावली (सीआर) के बजाय बाद के वर्षों की सीआर को आधार बनाकर पदोन्नति दी गई, जो नियमों के विपरीत है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में प्रत्येक चयन वर्ष के लिए अलग प्रक्रिया तय की गई थी, लेकिन कई विभागों ने उसका पालन नहीं किया। अधिकारियों ने सरकार से पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।