कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर सियासी घमासान, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
भोपाल में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके कथन कि “प्रशासनिक तंत्र में अधिकारी स्वयं को संघ से जुड़ा बताने की होड़ में रहते हैं” पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला बयान बताया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार अधिकारी किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के प्रति नहीं, बल्कि पूरी तरह संविधान के प्रति निष्ठावान होने चाहिए। पटवारी ने राज्यपाल और राष्ट्रपति से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग भी की।
आरएसएस से जुड़े अधिकारियों का प्रभाव बढ़ा
वहीं कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में आरएसएस से जुड़े अधिकारियों का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि यह बात पहले भी कांग्रेस नेतृत्व द्वारा उठाई जाती रही है और अब एक मंत्री ने भी इसे स्वीकार किया है।
इस विवाद पर बीजेपी ने बचाव की मुद्रा अपनाई है। बीजेपी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को संदर्भ में समझना चाहिए। उनके अनुसार, लंबे समय तक एक विचारधारा की सरकार रहने पर प्रशासन में कई ऐसे लोग आ जाते हैं जो अवसरवादी होते हैं। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय का इशारा ऐसे ही लोगों की ओर था, जो बिना विचारधारा के केवल अवसर के लिए व्यवस्था में शामिल हो जाते हैं।
कांग्रेस-बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है और कांग्रेस-बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप से किस दिशा में जाता है।