मध्यप्रदेश के नेटवर्क विहीन विद्यालयों में अतिथि श

नेटवर्क विहीन स्कूलों के अतिथि शिक्षकों को राहत की उम्मीद, री-ज्वाइनिंग और लंबित मानदेय पर विभाग सक्रिय

मध्यप्रदेश में नेटवर्क विहीन विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लंबित मानदेय और वर्तमान शैक्षणिक सत्र में री-ज्वाइनिंग को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से ऐसे स्कूलों और वहां काम करने वाले अतिथि शिक्षकों की जानकारी मांगी है, जहां किसी भी टेलीकॉम कंपनी का मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। जानकारी 11 अगस्त 2026 तक निर्धारित प्रारूप में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

री-ज्वाइनिंग में नेटवर्क बना बाधा

विभाग के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रिक्त पदों के आधार पर अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। लेकिन नेटवर्क सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षक नए सत्र में री-ज्वाइन नहीं कर सके। अब विभाग ऐसे स्कूलों की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।

शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड मांगा

जिला शिक्षा अधिकारियों से विद्यालय का नाम, यू-डाइस कोड, अतिथि शिक्षक का नाम, ट्राइबल आईडी और आईडी संबंधी विवरण सहित अन्य जरूरी जानकारी मांगी गई है। जिलों को यह जानकारी ई-मेल के माध्यम से लोक शिक्षण संचालनालय को भेजनी होगी।

तीन जिलों में मानदेय का मुद्दा

अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश ने नर्मदापुरम, कटनी और देवास की नेटवर्क विहीन शालाओं में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लंबित मानदेय का मुद्दा उठाया है। समिति का कहना है कि कुछ शिक्षकों को पिछले शैक्षणिक सत्र का मानदेय अब तक नहीं मिला है और वर्तमान सत्र में री-ज्वाइनिंग का अवसर भी नहीं दिया गया।

जल्द भुगतान और री-ज्वाइनिंग की मांग

समिति के प्रांताध्यक्ष सुनील परिहार ने विभाग से मांग की है कि लंबित मानदेय का जल्द भुगतान किया जाए। साथ ही नेटवर्क विहीन विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को वर्तमान शैक्षणिक सत्र में री-ज्वाइनिंग देने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

ई-अटेंडेंस का समय बदला

इधर, एक पॉली में संचालित स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का समय भी बदल दिया गया है। पहले शिक्षक एप पर सुबह 11:30 बजे तक अटेंडेंस लगा सकते थे, लेकिन अब समय घटाकर 10:30 बजे कर दिया गया है।

ग्रामीण शिक्षकों ने जताई परेशानी

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की सुविधा सीमित होने के कारण कई शिक्षकों के लिए 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने तकनीकी या परिवहन संबंधी समस्या की स्थिति में शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।