MP सरकार का नशे के खिलाफ बड़ा ऐलान: 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सिर्फ ड्रग्स पकड़ना नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि नशे के कारोबारियों, सप्लायरों और सिंडिकेट से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई अब और तेज होगी। CM ने नशे के कारोबार और ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ सरकार के रुख को एक बार फिर साफ कर दिया है
मुख्यमंत्री ने कहा यह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2029 तक देश को सभी प्रकार के नशे और ड्रग्स से मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मध्य प्रदेश पूरी ताकत से काम कर रहा है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सात राज्यों साथ मिलकर टूटेगा ड्रग्स नेटवर्क
मुख्यमंत्री के मुताबिक ड्रग्स का कारोबार किसी एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं है। नशे का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसी वजह से इसके खिलाफ कार्रवाई भी सीमित दायरे में नहीं हो सकती।
मध्य प्रदेश सरकार अपने पड़ोसी सात राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से लेकर आरोपियों तक पहुंचने और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर फोकस किया जा रहा है।सरकार का मकसद सिर्फ किसी एक आरोपी को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि ड्रग्स कहां से आ रहा है, कौन इसकी सप्लाई कर रहा है और इसके पीछे कौन सा बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
पुलिस ने कसे ड्रग माफिया पर शिकंजा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने अब तक कई अवैध ड्रग गिरोहों और सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की है। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ छोटी-मोटी गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। ड्रग्स के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क और उसके आर्थिक तंत्र को निशाना बनाने की तैयारी है।
नक्सलवाद की तर्ज पर लड़ाई
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नशे के खिलाफ सरकार की रणनीति की तुलना नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने नक्सलवादी गतिविधियों के खिलाफ मजबूती से कार्रवाई की है, उसी तरह की मुस्तैदी अब नशा माफिया के खिलाफ भी दिखाई जा रही है। यानी सरकार इसे महज कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती मान रही है।
निशाने पर युवा भी
नशे के खिलाफ सरकार की सबसे बड़ी चिंता युवा पीढ़ी को लेकर है। ड्रग्स का कारोबार युवाओं को अपना सबसे आसान निशाना बनाता है। ऐसे में सरकार का फोकस नशे की सप्लाई रोकने के साथ-साथ युवाओं को इस जाल में फंसने से बचाने पर भी है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की भावी पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बाहर रखना है। इसके लिए पुलिस कार्रवाई, राज्यों के बीच समन्वय और ड्रग नेटवर्क पर सीधा प्रहार करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि नशे के खिलाफ सरकार ने सख्त तेवर दिखाए हैं, लेकिन असली चुनौती ड्रग्स के उस नेटवर्क को तोड़ना है जो लगातार नए रास्ते तलाश रहा है। छोटी खेप पकड़ने से लेकर बड़े सिंडिकेट तक पहुंचने की कार्रवाई ही इस अभियान की असली परीक्षा होगी।
अब देखना होगा कि सरकार का 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य जमीन पर किस तरह दिखाई देता है और ड्रग्स के खिलाफ चल रहा अभियान कितनी दूर तक नशे के कारोबार की जड़ों को हिला पाता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान से इतना साफ है- मध्य प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि पूरे सिंडिकेट को निशाने पर लेकर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है।