मध्यप्रदेश में गुजरात से एशियाई शेरों को लाने और स

MP में चीतों के बाद अब एशियाई शेरों को बसाने की तैयारी, जंगलों में फिर गूंज सकती है दहाड़

मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के बाद अब एशियाई शेरों को बसाने की दिशा में भी तैयारी तेज होती नजर आ रही है। वन विभाग गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई शेर लाकर उनके संरक्षण और प्रजनन की संभावनाओं पर काम कर रहा है। अगर योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश के जंगलों में फिर शेरों की दहाड़ सुनाई दे सकती है।

नवंबर-दिसंबर तक आ सकता है शेरों का जोड़ा

मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों को लाने की प्रक्रिया को लेकर तैयारियां चल रही हैं। फिलहाल प्राथमिकता शेरों को सीधे जंगल में छोड़ने की बजाय नियंत्रित वातावरण में रखने और उनके संरक्षण एवं प्रजनन पर है। बताया जा रहा है कि नवंबर-दिसंबर तक शेरों के एक जोड़े को लाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

वन विहार में पहले से मौजूद है जोड़ा

भोपाल के वन विहार में एशियाई शेरों का एक नर-मादा जोड़ा पहले से मौजूद है। दिसंबर 2024 में गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क से यह जोड़ा वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत भोपाल लाया गया था। अब इनके संरक्षण और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कभी MP के जंगलों में रहते थे शेर

एशियाई शेरों की मध्यप्रदेश में वापसी की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कभी विंध्य, बुंदेलखंड और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी बताई जाती थी। लेकिन 19वीं सदी के अंत तक शेर मध्यप्रदेश से लगभग समाप्त हो गए। अब इनके दोबारा संरक्षण की कोशिश की जा रही है।

गुजरात में बढ़ रही शेरों की संख्या

गुजरात एशियाई शेरों का प्रमुख प्राकृतिक आवास है। 2025 की गणना में राज्य में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए थे। लगातार बढ़ती संख्या के कारण शेरों के लिए नए और सुरक्षित आवासों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश संभावित नए आवास के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है।

जंगल में छोड़ने से पहले कई चुनौतियां

शेरों को खुले जंगल में बसाने से पहले कई पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी होगा। इनमें उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार, पानी की उपलब्धता, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दे शामिल हैं। साथ ही शेरों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार को लेकर भी विस्तृत अध्ययन करना होगा।

सफल हुआ प्रोजेक्ट तो बड़ी उपलब्धि

अगर एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश में सुरक्षित तरीके से बसाने की योजना सफल होती है, तो यह राज्य के वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। चीता प्रोजेक्ट के बाद शेरों की वापसी से मध्यप्रदेश की पहचान देश के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण राज्यों में और मजबूत हो सकती है। अब नजर इस बात पर है कि यह योजना कब और किस स्वरूप में जमीन पर उतरती है।