MP के 8 अधिकारियों को मिली IPS में पदोन्नति, DPC ने लगाई मुहर
मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के अधिकारियों के लिए बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने राज्य पुलिस सेवा के 8 अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने की अनुशंसा पर मुहर लगा दी है। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और अन्य मानकों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया।
9 पदों के लिए हुई थी प्रक्रिया, 8 नामों को मंजूरी
सूत्रों के अनुसार आईपीएस पदोन्नति के लिए कुल 9 रिक्त पदों पर विचार किया गया था। विभागीय पदोन्नति समिति ने राज्य पुलिस सेवा के 27 अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) और अन्य पात्रता मानकों की समीक्षा की।लंबी चर्चा और परीक्षण के बाद 8 अधिकारियों के नामों को आईपीएस अवार्ड के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।
इन अधिकारियों को मिला आईपीएस अवार्ड
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सीताराम सदभैया (1997 बैच)
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मलय जैन (1998 बैच)
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अमित सक्सेना (1998 बैच)
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निमिषा पांडे (1998 बैच)
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मनीषा पाठक (1998 बैच)
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सुमन गुर्जर (1998 बैच)
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एस.एस. सराफ (1998 बैच)
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समर वर्मा (1998 बैच)
विभागीय जांच के कारण एक नाम सीलबंद लिफाफे में
सूत्रों के मुताबिक राज्य पुलिस सेवा अधिकारी राजेश मिश्रा के मामले पर अंतिम फैसला फिलहाल नहीं लिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने के कारण उनका मामला 'सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया' के तहत रखा गया है।प्रशासनिक नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में डीपीसी अधिकारी की पात्रता और सेवा रिकॉर्ड पर विचार तो करती है, लेकिन अंतिम निर्णय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी होने तक सुरक्षित रखा जाता है।डीपीसी की अनुशंसाएं अब केंद्र सरकार और संबंधित विभागों की औपचारिक प्रक्रिया से गुजरेंगी। इसके बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।अधिसूचना जारी होने के बाद चयनित अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा कैडर आवंटित किया जाएगा और उन्हें आईपीएस अधिकारी के रूप में मान्यता मिलेगी।
पुलिस मुख्यालय में उत्साह का माहौल
लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईपीएस अवार्ड की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय और संबंधित अधिकारियों के बीच उत्साह का माहौल है। वहीं विभागीय जांच का सामना कर रहे अधिकारी राजेश मिश्रा के मामले पर भी प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद उनके भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।