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केएस ऑयल्स पर ₹75 करोड़ के ट्रेड फाइनेंस घोटाले का आरोप, CBI ने चेयरमैन रमेश गर्ग समेत 12 के खिलाफ दर्ज की FIR

मध्य प्रदेश के मुरैना स्थित चर्चित केएस ऑयल्स एक बार फिर बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला करीब 75 करोड़ रुपये के ट्रेड फाइनेंस घोटाले का है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच के बाद केएस ऑयल्स के चेयरमैन रमेश चंद गर्ग सहित 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि सरकारी कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) के कुछ अधिकारियों और कंपनी के पदाधिकारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का वित्तीय घोटाला किया गया।

75 करोड़ रुपये का ट्रेड फाइनेंस मंजूर किया

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2010 से 2014 के बीच एसटीसी ने केएस ऑयल्स लिमिटेड को सरसों तेल की खरीद के लिए 75 करोड़ रुपये का ट्रेड फाइनेंस मंजूर किया था। जांच में सामने आया कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और साख का समुचित परीक्षण किए बिना ही वित्तीय मंजूरी दे दी गई। इतना ही नहीं, 75 करोड़ रुपये की सीमा के बावजूद करीब 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) जारी किए गए।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिन दो कंपनियों को सरसों तेल का सप्लायर बताया गया था, वे कथित तौर पर शेल कंपनियां थीं और उनका संचालन भी केएस ऑयल्स से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि एलसी के माध्यम से जारी की गई राशि अंततः वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचा दी गई।

लगभग 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब गुना और मुरैना स्थित स्टोरेज टैंकों का निरीक्षण किया गया। जहां सरसों तेल होना चाहिए था, वहां कथित तौर पर 90 प्रतिशत से अधिक पानी मिला। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने का भी आरोप है। इस पूरे प्रकरण से एसटीसी को लगभग 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।

कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कर रही

सीबीआई ने इस मामले में तत्कालीन एसटीसी अधिकारियों, केएस ऑयल्स लिमिटेड, चेयरमैन रमेश चंद गर्ग, डायरेक्टर दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड तथा उसके डायरेक्टर अमित खंडेलवाल समेत 12 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोम को सौंपी गई है। अब एजेंसी वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कर रही है।