ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में छत का प्लास्टर गि

खतरे में नौनिहाल! KRH की छत का प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बची दो महीने की मासूम

ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज से जुड़े कमलाराजा अस्पताल यानी KRH में जर्जर भवन के कारण एक बार फिर बड़ा हादसा होते-होते बच गया। अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। जिस वक्त यह घटना हुई, वार्ड में कई बच्चे भर्ती थे। प्लास्टर सीधे पलंग नंबर-19 पर गिरा, जहां दो महीने की एक मासूम बच्ची भर्ती थी। प्लास्टर के कुछ टुकड़े बच्ची को लगे, लेकिन गनीमत रही कि उसकी जान बच गई। घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा के लिहाज से वार्ड में भर्ती सभी 16 बच्चों को तत्काल दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया।

पलंग पर भर्ती थी दो महीने की बच्ची

हादसे की सबसे डरावनी तस्वीर यह है कि जिस पलंग पर छत का मलबा गिरा, उसी पर महज दो महीने की बच्ची भर्ती थी। अचानक ऊपर से प्लास्टर गिरने के बाद बच्ची और उसके परिजनों में दहशत फैल गई। बताया गया कि प्लास्टर के कुछ हल्के टुकड़े बच्ची तक पहुंचे और उसके कान में भी मलबा चला गया। हालांकि, बच्ची की जान बच गई और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। अगर प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिरता या हादसा कुछ अलग परिस्थितियों में होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। इस घटना ने अस्पताल में भर्ती मासूमों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

16 बच्चों को दूसरे वार्ड में किया गया शिफ्ट

प्लास्टर गिरने की घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने एहतियातन चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 को खाली कराया। वार्ड में भर्ती 16 बच्चों को दूसरे सुरक्षित वार्ड में शिफ्ट किया गया। बच्चों के इलाज और उनकी निगरानी की व्यवस्था दूसरे स्थान पर की गई। हालांकि, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि जिस अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज होता है, वहां जर्जर भवन के हिस्सों की नियमित जांच और मरम्मत क्यों नहीं की गई। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना उनका इलाज।

74 साल पुरानी है कमलाराजा अस्पताल की बिल्डिंग

कमलाराजा अस्पताल की मौजूदा बिल्डिंग करीब 74 साल पुरानी बताई जा रही है। इतने लंबे समय से लगातार उपयोग में रहने के कारण भवन के कई हिस्सों में मरम्मत और रखरखाव की जरूरत सामने आती रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत के साथ-साथ पुरानी वायरिंग बदलने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक पिछले चार वर्षों में कुल 11 प्रस्ताव शासन के पास भेजे गए हैं। इसके बावजूद अब तक उन प्रस्तावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से भवन की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।

2024 से अब तक हो चुके हैं 8 हादसे

अस्पताल में जर्जर भवन से जुड़ी समस्या कोई नई नहीं है। वर्ष 2024 से अब तक यहां करीब 8 हादसे हो चुके हैं। इनमें छत और प्लास्टर गिरने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि अकेले वर्ष 2026 में ही तीन बार प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बार-बार होने वाली इन घटनाओं के बावजूद अगर भवन की गंभीर मरम्मत नहीं की जाती है, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चिल्ड्रन वार्ड में हुई घटना ने इस खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है।

11 प्रस्ताव भेजे, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

अस्पताल प्रबंधन की ओर से भवन की मरम्मत और पुरानी वायरिंग बदलने के लिए शासन को 11 प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद अब तक उन पर ठोस अमल नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। आखिर जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कितने हादसों का इंतजार किया जाएगा? खासकर उन वार्डों में जहां छोटे बच्चे, गंभीर मरीज और उनके परिजन हर समय मौजूद रहते हैं, वहां सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता खतरनाक साबित हो सकता है।

अस्पताल में इलाज या जान का खतरा?

कमलाराजा अस्पताल ग्वालियर-चंबल अंचल के प्रमुख अस्पतालों में शामिल है, जहां ग्वालियर के अलावा आसपास के जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे अस्पताल की बिल्डिंग की सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर छत का प्लास्टर मरीजों के ऊपर गिरने लगे तो यह केवल रखरखाव की समस्या नहीं, बल्कि सीधे मरीजों की जान से जुड़ा सवाल बन जाता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि जर्जर हिस्सों की पहचान कर समय रहते उनकी मरम्मत की जाए।

हादसा टला, लेकिन चेतावनी बड़ी है

कमलाराजा अस्पताल में हुआ यह हादसा फिलहाल बड़ी जनहानि के बिना टल गया, लेकिन इसने आने वाले खतरे की गंभीर चेतावनी जरूर दे दी है। दो महीने की मासूम बच्ची जिस तरह बाल-बाल बची, वह किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था। अब जरूरत सिर्फ हादसे के बाद वार्ड खाली कराने या मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की नहीं, बल्कि हादसे होने से पहले जरूरी कदम उठाने की है। 74 साल पुरानी बिल्डिंग के जर्जर हिस्सों की जांच, मरम्मत और पुरानी वायरिंग को बदलने का काम जल्द होना जरूरी है। सवाल यही है कि क्या प्रशासन अब 11 प्रस्तावों पर कार्रवाई करेगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?