झारखंड पीपुल्स पार्टी के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा

‘29 जुलाई से पहले नया नेता चुन लें हेमंत सोरेन’: पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा का दावा, संभावित राजनीतिक संकट की चेतावनी

29 जुलाई से पहले नया नेता चुन लें हेमंत सोरेन: पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा का दावा, संभावित राजनीतिक संकट की चेतावनी

झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड पीपुल्स पार्टी (जेपीपी) के संस्थापक एवं पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर शनिवार को बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यदि 23 जुलाई को प्रस्तावित चार्जशीट दाखिल होती है, तो उसके बाद राजनीतिक और संवैधानिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 29 जुलाई से पहले पार्टी का नया नेता चुन लेना चाहिए।

शनिवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में बेसरा ने कहा कि संभावित कानूनी कार्रवाई को देखते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करना चाहिए, ताकि सरकार के कामकाज पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

सूर्य सिंह बेसरा

चार्जशीट का हवाला देकर दी राजनीतिक सलाह

सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि 23 जुलाई को एमपी-एमएलए कोर्ट में प्रस्तावित चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की संभावना बन सकती है। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा होता है तो राज्य में राजनीतिक और संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।

उन्होंने सलाह दी कि संभावित स्थिति से पहले ही मुख्यमंत्री अपनी मौजूदगी में पार्टी विधायक दल का नया नेता चुन लें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सरकार का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

लालू यादव का उदाहरण दिया

अपने तर्क के समर्थन में बेसरा ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब लालू यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी, तब उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नए नेतृत्व का रास्ता साफ किया था। बेसरा का दावा है कि झारखंड में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।

हालांकि, उन्होंने जो बातें कहीं, वे उनके व्यक्तिगत दावे और राजनीतिक आकलन हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मतांतरण और आरक्षण नीति पर भी रखी राय

प्रेस वार्ता के दौरान बेसरा ने मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि धर्म परिवर्तन को लेकर कोई नया नियम बनाया जाता है तो वह केवल अनुसूचित जनजाति (एसटी) तक सीमित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि यह नियम अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य सभी वर्गों पर समान रूप से लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण लाभ देने की नीति पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति से सोनम वांगचुक के मुद्दे पर हस्तक्षेप की अपील

पूर्व विधायक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 20वें दिन में पहुंच गया है। बेसरा ने राष्ट्रपति को संदेश भेजकर वांगचुक के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

सोनम वांगचुक

उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, न कि सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से। बेसरा ने झारखंड के युवाओं से भी अपील की कि वे इस आंदोलन में भागीदारी कर शिक्षा सुधार के मुद्दे का समर्थन करें।

प्रेस वार्ता के दौरान बेसरा ने राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, सामाजिक मुद्दों और शिक्षा सुधार से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखते हुए सरकार से विभिन्न मामलों में ठोस पहल करने की मांग की।