झारखंड को मिले 99 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, CM सोरेन ने रखा विकास का नया विजन
झारखंड सरकार ने राज्य को निवेश, तकनीकी नवाचार और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के दीर्घकालिक विकास का नया विजन पेश करते हुए कहा कि अब राज्य की पहचान केवल खनिज संपदा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक तकनीक के हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार ने जिंदल ग्रुप, टाटा समूह, वरुण बेवरेजेस, गूगल, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर समेत कई प्रमुख औद्योगिक घरानों और वैश्विक संस्थाओं के साथ 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। सरकार के अनुसार इन समझौतों के माध्यम से 99 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की ड्राफ्ट नीतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
'एमओयू नहीं, झारखंड के भविष्य की नींव'
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ये समझौते महज कागजी औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतियां तैयार करना है, जो राज्य में दीर्घकालिक औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति का आधार बनें।
उन्होंने कहा कि झारखंड की बौद्धिक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नवाचार और शोध से जुड़े संस्थानों का स्वागत किया जाएगा। सरकार नई तकनीकों को अपनाकर राज्य को देश के प्रमुख रिसर्च और इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना चाहती है।
लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अल्पकालिक योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक साझेदारी पर फोकस कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश और विकास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए, ताकि निवेशकों का विश्वास मजबूत हो और राज्य को शीघ्र लाभ मिल सके।
आदिवासी समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
हेमंत सोरेन ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जियाडा (JIADA) के नियमों में आदिवासी समूहों को दी जा रही 25 प्रतिशत रियायत का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को इस सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश दिया।
निवेशकों से संवाद होगा और मजबूत
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अतीत में प्रभावी संवाद की कमी के कारण झारखंड की संभावनाएं वैश्विक स्तर पर पूरी तरह सामने नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि अब सरकार देश और विदेश के निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी, ताकि राज्य में अधिक निवेश आकर्षित किया जा सके।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी उद्योग प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों, केंद्रीय मंत्रियों और निवेशकों का आभार व्यक्त करते हुए झारखंड के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।