भारतीय रेलवे ने पूरा किया पहला हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का निर्माण
नई दिल्ली। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि भारतीय रेल ने अपनी पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन का निर्माण पूरा कर लिया है। यह एक अत्याधुनिक पायलट परियोजना है, जिसे रिसर्च, डिजाइन और स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइज़ेशन (RDSO) की विशिष्टताओं के अनुसार तैयार किया गया है।
हरियाणा के जिंद में विशेष हाईट्रोजन संयंत्र प्रस्तावित
मंत्री ने लिखित उत्तर में बताया कि इस पहल का उद्देश्य ट्रेन संचालन में हाइड्रोजन-आधारित तकनीक के उपयोग को प्रदर्शित करना है। इसके लिए हरियाणा के जिंद में एक विशेष हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र प्रस्तावित किया गया है, जहाँ इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा। मंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन-सेट में कई "महत्वपूर्ण तत्व" शामिल हैं, जिसमें पूरी तरह भारत द्वारा डिजाइन और विकसित तकनीक का उपयोग किया गया है — यह भारतीय रेलवे की आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह दुनिया की सबसे लंबी औऱ शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन सेट
वैष्णव ने बताया, यह नई बनी ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन सेट है। इसमें 10 कोच हैं और यह 2400 kW का है। इसमें दो ड्राइविंग पावर कार (1200 kW प्रत्येक) और आठ यात्री कोच शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि ट्रेन शून्य CO₂ उत्सर्जनकरतीहै।इसका एकमात्र उत्सर्जन जलवाष्प है।
रेवले की अगली पीढ़ी की दिशा में बड़ा कदम
इसे अगली पीढ़ी की रेलवे ईंधन तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए मंत्री ने कहा कि इस परियोजना में पूरी प्रणाली को शुरुआत से डिजाइन करना, प्रोटोटाइप बनाना और पहली बार भारतीय रेल के लिए हाइड्रोजन ट्रैक्शन तकनीक विकसित करना शामिल रहा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि ट्रेन और उससे संबंधित अवसंरचना एक पायलट कार्यक्रम का हिस्सा हैं, इसलिए इस चरण में हाइड्रोजन-ईंधन ट्रेन की लागत की तुलना मौजूदा प्रणालियों से करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट रेलवे की स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने और भारत में अधिक टिकाऊ परिवहन भविष्य की दिशा में प्रतिबद्धता दर्शाता है।