देश की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर गिरी, बिजली और खनन क्षेत्रों का गिरावट से वृद्धि दर 14 माह के निचले स्तर पर..
Industrial Production : भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अच्छे प्रदर्शन से उलट देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में अक्टूबर में गिरावट दर्ज की गयी है। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर अक्टूबर में 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों यह जानकारी दी गयी है।
इस गिरावट का मुख्य कारण खनन और बिजली जैसे क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन रहा है। औद्योगिक वृद्धि दर 0.4 प्रतिशत रही है। यह पिछले साल की समान अवधि में 3.7 प्रतिशत थी। सितंबर के संशोधित अनुमान में औद्योगिक उत्पादन बढ़कर 4.6 प्रतिशत रहा है। इसके पहले अक्टूबर 2025 की तुलना में अगस्त 2024 में आईआईपी वृद्धि कम दर्ज हुई थी।
अक्टूबर 2024 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 7 महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) में औसत आईआईपी वृद्धि 2.7 प्रतिशत थी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इस अवधि के दौरान औसत वृद्धि 4 प्रतिशत थी। विकास दर अर्थशास्त्रियों के 3.1% के अनुमान से काफी नीचे रही और सितंबर के संशोधित 4.6% वार्षिक वृद्धि से तेज गिरावट दर्ज की गई।
भारत सरकार के "प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो" द्वारा जारी सूचना के मुताबिक सूचकांक में 78 प्रतिशत भागीदारी वाले विनिर्माण का उत्पादन अक्टूबर में 1.8 प्रतिशत बढ़ा है, जो सितंबर में 5.6 प्रतिशत था। खनन का उत्पादन लगातार दूसरे महीने संकुचित होकर 1.8 प्रतिशत और बिजली उत्पादन घटकर अक्टूबर में 6.9 प्रतिशत रह गया है। सांख्यिकी मंत्रालय ने बिजली उत्पादन में कमी की वजह लंबे चले मॉनसून और कुछ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कम तापमान को बताया है।
सांख्यिकी विभाग के मुताबिक कुल मिलाकर 23 औद्योगिक समूहों में से 14 क्षेत्रों में अक्टूबर में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें कुछ उपभोक्ता और निर्यात केंद्रित क्षेत्र जैसे खाद्य उत्पाद, परिधान, टेक्सटाइल, चमड़ा और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। वहीं सिर्फ 9 औद्योगिक समूह जैसे मूल धातुओं (6.6 प्रतिशत), कोक और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों (6.2 प्रतिशत) और मोटर वाहनों, ट्रेलर और सेमी ट्रेलर (5.8 प्रतिशत) में तेजी दर्ज की गई है। उपभोग पर आधारित श्रेणियों में सभी 6 उपक्षेत्रों का प्रदर्शन अक्टूबर महीने में सालाना आधार पर और इसके पहले महीने की तुलना में गिरा है।
उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता वस्तुओं में अक्टूबर में 0.5 प्रतिशत का संकुचन आया है, जबकि सितंबर में वृद्धि दर 10 माह के उच्च स्तर 10.2 प्रतिशत पर थी। प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन 0.6 प्रतिशत कम हुआ है, जिसकी वजह खनन व बिजली क्षेत्रों का कमजोर प्रदर्शन है। वहीं इंटरमीडिएट वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं में अक्टूबर महीने में 0.9 प्रतिशत और 2.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो सितंबर क्रमशः 6.3 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत की तुलना में कम है।
बुनियादी ढांचा वस्तुओं की अक्टूबर में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही है और पिछले 3 महीने से हो रही दो अंकों की वृद्धि दर का सिलसिला टूट गया है। रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) की वृद्धि में संकुचन जारी रहा और इसकी वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का अनुमान हर महीने की 28 तारीख को जारी किया जाता है। नवंबर में, इसे 1 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया था क्योंकि यह दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के जारी होने से टकरा रहा था। नवंबर के लिए अगला आईआईपी डेटा सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को जारी किया जाएगा। यह सूचकांक स्रोत एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके संकलित किया जाता है, जो उत्पादक कारखानों और प्रतिष्ठानों से आंकड़े एकत्र करते हैं।
"केयरएज रेटिंग्स" में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि मजबूत पूंजीगत व्यय की वजह से इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी वस्तुओं के क्षेत्र में तेजी बनी रही है। "इक्रा रेटिंग्स" में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नाबर ने कहा कि अमेरिकी शुल्क के खराब असर का असर विनिर्माण के कुछ उपक्षेत्रों में हो सकता है।
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