'नई योजना से बढ़ेगा हिमाचल पर वित्तीय दबाव', CM सुक्खू ने केंद्र के प्रस्ताव पर जताई आपत्ति; VB-GRAMG लागू का किया विरोध
हिमाचल प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर केंद्र सरकार की प्रस्तावित 'वीबी-जी-राम-जी (VB-GRAMG)' योजना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह व्यवस्था हिमाचल जैसे सीमित वित्तीय संसाधनों वाले राज्य के लिए व्यावहारिक नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाएगी।
'मनरेगा में पूरा खर्च केंद्र उठाता था, नई योजना में राज्य को भी देना होगा हिस्सा'
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत परियोजनाओं का पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन करती रही है। इसके विपरीत, प्रस्तावित VB-GRAMG योजना में कुल व्यय का 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को देना होगा। उनका कहना था कि इससे हिमाचल प्रदेश के पहले से सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जो राज्य के हित में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यदि नई योजना लागू की जाती है तो उसका वित्तीय प्रभाव राज्य पर पड़ेगा और इसी कारण सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार से विस्तार से चर्चा करेगी।
खाली पद भरने और ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। साथ ही आवश्यकता के अनुसार नई भर्तियां भी की जाएंगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति बनी रहे और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए।
पंचायत भवनों के लिए 30 करोड़ रुपये, स्वयं सहायता समूहों को भी मिलेगा प्रोत्साहन
ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन पंचायत भवनों को पूरा करने के लिए 30 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके अलावा ऊना में बन रहे जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण के लिए भी अतिरिक्त धनराशि जारी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। सरकार के अनुसार अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को कुल 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। इनके उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए शिमला में 'हिमाचल हाट' विकसित किया जा रहा है, जबकि पंडोह और कुल्लू में नए शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। भविष्य में स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त फूड वैन भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना देरी पहुंचे। उन्होंने विभाग की प्रमुख योजनाओं को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ने के भी निर्देश दिए, जिससे उनकी ऑनलाइन निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सके।