हिमाचल CM सुक्खू का बड़ा भंगाल दौरा: दुर्गम क्षेत्र में करेंगे रात्रि प्रवास, आपदा नुकसान का लेंगे जायजा
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शुक्रवार को कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया। यहां से वह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सर्किट हाउस, धर्मशाला के लिए रवाना हुए। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने अपने प्रस्तावित बड़ा भंगाल दौरे को ऐतिहासिक और प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लंबे समय से प्रस्तावित था, जिसे अब अंतिम रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री 'सरकार गांव के द्वार' अभियान के तहत प्रदेश के सबसे दुर्गम इलाकों में शामिल बड़ा भंगाल में एक रात का प्रवास भी करेंगे।
स्थानीय लोगों से करेंगे सीधा संवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे लोगों तक विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। प्रवास के दौरान वह स्थानीय लोगों से सीधे मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं, जरूरतों तथा विकास संबंधी अपेक्षाओं को जानेंगे।
उन्होंने बताया कि हाल ही में प्राकृतिक आपदा से बड़ा भंगाल क्षेत्र में हुए नुकसान का भी मौके पर जाकर आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों की सहायता करना सरकार और जनप्रतिनिधियों दोनों की जिम्मेदारी है।
सड़क संपर्क और विकास योजनाओं पर होगा मंथन
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार बड़ा भंगाल को सड़क मार्ग से जोड़ने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही क्षेत्र के समग्र विकास के लिए नई योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
हिमाचल का सबसे दुर्गम गांवों में शामिल है बड़ा भंगाल
बड़ा भंगाल, कांगड़ा जिले की बैजनाथ तहसील के अंतर्गत आने वाली एक अत्यंत दुर्गम पंचायत है। यह धौलाधार और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच गहरी घाटी में स्थित है। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण यह क्षेत्र आज भी देश के सबसे कठिन पहुंच वाले इलाकों में गिना जाता है।
यहां पहुंचने के लिए कांगड़ा की बजाय चंबा जिले के होली या कुल्लू के मनाली मार्ग से लगभग 18,000 फीट ऊंचे दर्रों, जैसे थामसर पास, को पार करना पड़ता है। यह कई दिनों की कठिन और जोखिम भरी पैदल यात्रा है।
सर्दियों में दुनिया से कट जाता है इलाका
भारी बर्फबारी के कारण बड़ा भंगाल हर वर्ष लगभग पांच से छह महीने तक देश-दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। यहां के अधिकांश लोग भेड़ पालन और पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं। सर्दियों के दौरान राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए ग्रामीणों को सरकारी हेलीकॉप्टर पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रदेश के इतिहास में अब तक बहुत कम मुख्यमंत्री इस दुर्गम क्षेत्र तक पहुंचे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सुक्खू का यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और वहां के लोगों से सीधे संवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।