हरियाणा में नशे के खिलाफ बड़ा अभियान: बनेगी ज्वाइंट टास्क फोर्स, CM बोले- सौदागरों में ऐसा खौफ पैदा करें कि धंधा छोड़ दे
हरियाणा सरकार ने प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में शुक्रवार को बड़ा कदम उठाते हुए नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ज्वाइंट टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह विशेष टीम नशे की बिक्री पर रोक लगाने, तस्करों की पहचान करने और उनके खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन टास्क फोर्स को इतना प्रभावी बनाया जाए कि नशे के सौदागर खुद इस अवैध कारोबार से तौबा करने को मजबूर हो जाएं।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जातियां एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय (सेवा) विभाग की आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री घोषणाओं, बजट प्रावधानों और संकल्प पत्र में किए गए वादों की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक के अंत में उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग देने की शपथ भी दिलाई।
गांव से शहर तक सक्रिय होगी संयुक्त टीम
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल नशा करने वालों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने 'सेवा' विभाग के नेतृत्व में गांवों में सरपंच, वार्ड सदस्य, बीडीपीओ, एसएचओ और स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को शामिल करते हुए संयुक्त टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। वहीं, शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय सचिव, वार्ड पार्षद, थाना प्रभारी और स्वयंसेवी संस्थाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टास्क फोर्स उन स्थानों की पहचान करेगी जहां नशे की बिक्री होती है और वहां विशेष अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार में लिप्त लोगों के मन में कानून और प्रशासन का भय होना चाहिए।
नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर भी रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की लत से बाहर आए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए राज्य में नए नशा मुक्ति केंद्र और पुनर्वास केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि इलाज के बाद केंद्र से बाहर आने वाले लोगों की कम से कम तीन महीने तक नियमित निगरानी की जाए। साथ ही उन्हें कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की जाए, ताकि वे दोबारा नशे की गिरफ्त में न आएं।
राज्य में 119 नशा मुक्ति केंद्र संचालित
बैठक में 'सेवा' विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा ने बताया कि हरियाणा में वर्तमान में 119 नशा मुक्ति केंद्र, 29 पुनर्वास केंद्र और दो मनोरोग अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कुरुक्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत छह एकड़ भूमि पर एक आधुनिक पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विभाग ने ड्रग एडिक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से नशामुक्त हो चुके लोगों की नियमित निगरानी की जाती है, ताकि उनके दोबारा नशे की लत में लौटने की संभावना को रोका जा सके। इसके अलावा 'सेवा' विभाग राज्य में 35 विभिन्न योजनाओं के जरिए पात्र व्यक्तियों और परिवारों को पेंशन समेत अन्य आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रहा है।