ग्वालियर कृषि कार्यशाला में बिजली गुल होने पर प्रशासन सख्त, PWD के 4 इंजीनियरों को नोटिस
ग्वालियर में आयोजित उन्नत कृषि संभागीय कार्यशाला के दौरान हुई बिजली और साउंड सिस्टम की अव्यवस्था अब अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। 6 जुलाई को कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश के मंत्री, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। इसी दौरान अचानक बिजली गुल हो गई और मंच का माइक सिस्टम भी बंद हो गया, जिससे कुछ समय के लिए पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया।
आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान बिजली व्यवस्था बाधित होने के बाद बैकअप के लिए लगाए गए जनरेटर ने भी काम नहीं किया। वीआईपी मेहमानों और बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस तकनीकी लापरवाही से प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा और आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे।
अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया
मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कार्यक्रम से पहले बिजली, लाइटिंग और साउंड सिस्टम की जांच एवं निगरानी की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की थी। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया।
बड़ी तकनीकी लापरवाही कैसे हुई
कलेक्टर के निर्देश पर PWD के चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें कार्यपालन यंत्री मौसम जैन, सहायक यंत्री प्रदीप कुमार कटारा, उपयंत्री सारस चंदेरिया और सहायक विद्युत निरीक्षक निशांत श्रीवास्तव शामिल हैं।कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से पूछा गया है कि महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में इतनी बड़ी तकनीकी लापरवाही कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ निलंबन समेत सख्त विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी आयोजनों में व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार विभागों पर निगरानी और बढ़ने की संभावना है।