‘सतलुज’ फिल्म विवाद: ओटीटी से हटने पर पंजाब में सियासी घमासान, दिलजीत दोसांझ ने उठाए सवाल
पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब में नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म 3 जुलाई को ओटीटी पर रिलीज हुई थी, लेकिन महज तीन दिन बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस फैसले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। फिल्म में अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है।
बताया जा रहा है कि फिल्म का विषय बेहद संवेदनशील है। इसमें पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित फर्जी एनकाउंटर और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को दिखाया गया है। खालड़ा ने इन मामलों को उजागर किया था और बाद में 1995 में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। फिल्म में तत्कालीन पुलिस और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसी वजह से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म में 120 से अधिक कट लगाने के निर्देश दिए थे, जिसके कारण इसकी रिलीज लंबे समय तक टलती रही। फिल्म का नाम भी पहले
‘घल्लूघारा’, फिर ‘पंजाब 95’ और अंत में ‘सतलुज’ रखा गया
फिल्म के ओटीटी से हटने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारण बताए जा रहे हैं। आशंका जताई गई है कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक तत्व माहौल बिगाड़ने के लिए कर सकते हैं, खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले।
अब फिल्म भी गायब हो गई
फिल्म हटाए जाने पर दिलजीत दोसांझ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फिल्म के साथ वही हुआ जो जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था.वे भी अचानक गायब हुए थे और अब फिल्म भी गायब हो गई। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इतिहास के सच को दबाने की कोशिश बताया।
फिल्म पर विवाद लगातार गहराता जा रहा
वहीं, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी फिल्म हटाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंजाब के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और फिल्म पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।