Dussehra 2025: दशहरा आज; जानें शुभ मुहूर्त, रावण दहन का समय और महत्व
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: अश्विन महीने की शुरुआत माता के नौ रूपों की भक्ति के नौ दिनों के साथ होती है. इसी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन दशहरे का त्योहार मनाया जाता है. इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकेश रावण पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है. दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले के दहन की परंपरा है. साथ ही इस दिन शस्त्र पूजन का भी बड़ा महत्व है. वहीं, इस बार 2 अक्टूबर यानी आज दशहरा मनाया जा रहा है.
दशहरा का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की दशमी तिथि 1 अक्टूबर शाम 7 बजकर 01 मिनट पर शुरू होकर 2 अक्टूबर यानी आज शाम 7 बजकर 10 मिनट में समापन होगा.
अस्त्र शस्त्र की पूजा का मुहूर्त- आज दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक
पूजन का मुहूर्त- आज दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक
वाहन खरीदने का मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक
रावण दहन का मुहूर्त- प्रदोष काल में (सूर्यास्त के बाद) इसे आरंभ किया जाएगा.
दशहरा की कथा माता ने किया था महिषासुर का वध : इस दिन माता कात्यायनी दुर्गा ने देवताओं के अनुरोध पर महिषासुर का वध किया था तब इसी दिन विजय उत्सव मनाया गया था. इसी के कारण इसे विजयादशमी कहा जाने लगा. विजया माता का एक नाम है. यह पर्व प्रभु श्रीराम के काल में भी मनाया जाता था और श्रीकृष्ण के काल में भी. माता द्वारा महिषासुर का वध करने के बाद से ही असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी मनाया जाने लगा. श्रीराम ने किया था रावण वध वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने ऋष्यमूक पर्वत पर आश्विन प्रतिपदा से नवमी तक आदिशक्ति की उपासना की थी. इसके बाद भगवान श्रीराम इसी दिन किष्किंधा से लंका के लिए रवाना हुए थे. यह भी कहा जाता है कि रावण वध के कारण दशहरा मनाया जाता है. दशमी को श्रीराम ने रावण का वध किया था. श्रीराम ने रावण का वध करने के पूर्व नीलकंठ को देखा था. नीलकंठ को शिवजी का रूप माना जाता है. अत: दशहरे के दिन इसे देखना बहुत ही शुभ होता है। रावण का वध करने के बाद से ही यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाया जाता है. पांडवों की जीत यह भी कहा जाता है कि इसी दिन पांडवों को वनवास हुआ था और वे वनवास के लिए प्रस्थान कर गए थे. इसी दिन अज्ञातवास समाप्त होते ही, पांडवों ने शक्तिपूजन कर शमी के वृक्ष में रखे अपने शस्त्र पुनः हाथों में लिए एवं विराट की गाएं चुराने वाली कौरव सेना पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी। इसी दिन पांडवों ने कौरवों पर भी विजय प्राप्त की थी.