दतिया उपचुनाव में भाजपा को चुनौती, कांग्रेस प्रत्याशी को सपा का समर्थन; सियासी समीकरण बदले
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के नामांकन के दौरान समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। सपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ नामांकन स्थल पहुंचे और कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव लड़ने की घोषणा की।
कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएगी
मनोज यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ है और दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। सपा के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि दतिया क्षेत्र में यादव समाज के मतदाताओं की भूमिका अहम रही है, ऐसे में सपा का समर्थन कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है और भाजपा के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
चुनावी अभियान की शुरुआत..
कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने नामांकन दाखिल करने से पहले मां पीतांबरा पीठ पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने प्राचीन बनखंडेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर चुनावी अभियान की शुरुआत की। बाद में वे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपना नामांकन पत्र जमा किया।
नामांकन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन के बाद कांग्रेस ने बाईपास रिंग रोड स्थित सभा स्थल पर शक्ति प्रदर्शन के रूप में विशाल जनसभा का आयोजन किया।
समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही
मीडिया से चर्चा करते हुए घनश्याम सिंह ने दतिया की स्थानीय समस्याओं को चुनाव का मुख्य मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि जिले में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोग परेशान हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है।
इसका फैसला आने वाले चुनाव परिणाम
कांग्रेस प्रत्याशी ने किसानों, युवाओं और व्यापारियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, खाद-बीज की कीमतों और रोजगार की कमी से लोग परेशान हैं। वहीं, भाजपा के सामने अब कांग्रेस और सपा के संयुक्त मुकाबले की चुनौती खड़ी हो गई है। दतिया उपचुनाव में गठबंधन की यह रणनीति कितना असर दिखाती है, इसका फैसला आने वाले चुनाव परिणाम करेंगे।