दतिया उपचुनाव में बूथ से बिरादरी तक जंग, भाजपा का ‘वार रूम’ तो कांग्रेस का जातीय समीकरण दांव पर
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ प्रचार और जनसभाओं तक सीमित नहीं रह गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनावी रणनीति को बूथ मैनेजमेंट और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द तैयार किया है। दोनों दल इस सीट को प्रतिष्ठा का सवाल मानते हुए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
भाजपा ने 291 बूथों पर संभाला मोर्चा
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पार्टी ने विधानसभा के सभी 291 मतदान केंद्रों पर बूथ प्रभारी नियुक्त किए हैं। पूरे क्षेत्र को 21 शक्ति केंद्रों में बांटा गया है, जहां विधायक और पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी दी गई है। इन नेताओं का काम कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, मतदाताओं से संपर्क और मतदान प्रतिशत बढ़ाने की रणनीति पर काम करना है।
जातीय समीकरण पर भाजपा का फोकस
भाजपा ने समाज के प्रभावशाली नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय किया है। ब्राह्मण मतदाताओं के बीच पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा समेत कई वरिष्ठ नेता मोर्चा संभाल रहे हैं। क्षत्रिय समाज के लिए मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कुशवाहा समाज को साधने के लिए मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, सांसद भारत सिंह कुशवाहा और जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा सक्रिय हैं। एससी-एसटी वर्ग के बीच भी पार्टी ने बड़े नेताओं को उतारा है।
कांग्रेस ने भी उतारे दिग्गज
कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए अलग-अलग नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। ब्राह्मण समाज में पीपी शर्मा, हेमंत कटारे और प्रवीण पाठक जैसे नेता सक्रिय हैं। क्षत्रिय समाज के बीच डॉ. गोविंद सिंह और जयवर्धन सिंह प्रचार कर रहे हैं। वहीं ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग नेताओं को मैदान में उतारा गया है।
बूथ मैनेजमेंट बनेगा निर्णायक
दतिया उपचुनाव में उम्मीदवारों के साथ-साथ दोनों दलों की संगठन क्षमता की भी परीक्षा होगी। भाजपा जहां मजबूत बूथ नेटवर्क के सहारे बढ़त बनाने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को चुनावी हथियार बना रही है। अब अंतिम मुकाबला मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता और वोटरों को बूथ तक पहुंचाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।