22 करोड़ का ओवरब्रिज पहली बारिश में फटा, उद्घाटन के 15 दिन बाद ही खुली निर्माण की पोल!
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने दो नए रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें सबसे गंभीर मामला बरगा रेलवे ओवरब्रिज का है, जहां उद्घाटन के महज 15 दिन बाद ही पुल बीच से फट गया और करीब 60 से 70 फीट लंबी तथा 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें पड़ गईं। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों में दहशत
राजनांदगांव और डोंगरगढ़ के बीच बरगा तथा आलीवारा में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए थे। दोनों पुलों का लोकार्पण जून 2026 में किया गया था और इन्हें हाल ही में आम जनता के लिए खोला गया था। लेकिन पहली ही बारिश के बाद बरगा ओवरब्रिज की सड़क बीच से दो हिस्सों में बंट गई। पुल पर कई जगह गहरी दरारें दिखाई देने लगीं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
दूसरी ओर आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की हालत भी खराब हो गई है। यहां सड़क का एक हिस्सा बह गया, किनारों की बाउंड्री टूट गई और तीन-चार स्थानों पर पुल का बेस धंस गया। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हिस्सों पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
किसी ने ध्यान नहीं दिया
घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, पुल की गिट्टी और डामर हाथ से ही उखड़ रहे हैं, जबकि सीमेंट भी अच्छी गुणवत्ता का नहीं लगता। लोगों का दावा है कि निर्माण के दौरान भी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों ने पुल पर पहुंचकर रेलवे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि नागपुर मंडल के पीआरओ फैज खान ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। वहीं रेलवे के सहायक अभियंता मिथिलेश कुमार ने तकनीकी टीम भेजकर निरीक्षण कराने की बात कही है।
एक बार फिर बड़े सवाल खड़े
इधर, कोरबा जिले के करतला विकासखंड स्थित भैसामुड़ा गांव में जोगीनाला पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी पुलिया भी पहली ही बारिश में टूट गई। तेज बहाव में पुलिया का एक हिस्सा बह गया, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए और आवागमन बाधित हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर कोई सूचना पटल तक नहीं लगाया गया, जिससे निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।