भोपाल में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन का समापन

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर-: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों एवं वैश्विक प्रतिनिधियों का सम्मेलन संपूर्ण राज्य के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर, समृद्ध प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को विश्व पटल पर अत्यंत प्रभावशीलता और गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठकों के समापन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के गहन मंथन और बहुपक्षीय चर्चाओं के उपरांत सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को अपनाया गया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय चिंतन के मूल मंत्रों—'वसुधैव कुटुंबकम', 'जीओ और जीने दो' तथा 'सर्वे भवंतु सुखिनः'—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यह प्राचीन अवधारणा विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि देश का 'हृदय स्थल' मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी और मेजबान बनकर गौरवान्वित हुआ है। मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक स्थापत्य कला और जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, विशिष्ट व्यंजनों और आत्मीय आतिथ्य का एक अलौकिक अनुभव प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस बैठक के माध्यम से न केवल ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई है, बल्कि मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल प्रबंधन के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सभी सहभागी देशों के प्रतिनिधियों का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।

'भोपाल घोषणा पत्र' से व्यावहारिक और दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त-केंद्रीय मंत्री  शेखावत

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का एक सुव्यवस्थित क्रम आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, दूसरी बैठक 4–5 जून 2026 को वाराणसी में और तीसरी बैठक 5–6 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित की गई। इन बैठकों के गहन विचार-विमर्श का समापन 8 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा पत्र' को पारित किया गया।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सम्मेलन की मूल थीम "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी। सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के घोषणा पत्र केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित रहते हैं, लेकिन 'भोपाल घोषणा पत्र' एक परिणामोन्मुख (Outcome-based), व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख दस्तावेज है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, क्रियान्वयन का मार्ग और समय-सीमा तय की गई है। इस बैठक में भारत सहित 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड) शामिल थे।

भोपाल घोषणा पत्र की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों (CCI) तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके तहत कलाकारों, शिल्पकारों और रचनाकारों की नेटवर्किंग, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच प्रदान करने का तंत्र विकसित किया जाएगा। भारत के विशेष प्रस्ताव पर सभी ब्रिक्स एवं साझेदार देशों ने सर्वसम्मति से 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' (Voluntary Artists Registry) बनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य कलाकारों का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना और 'जन से जन संपर्क' (People-to-People Contact) को सुदृढ़ बनाना है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि घोषणा पत्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों व सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण तथा दस्तावेजी धरोहरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संस्थागत ढांचा विकसित करने पर सहमति बनी है। भारत के सारनाथ स्तूप का उदाहरण देते हुए घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से साझा सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मान्यता दिलाने में आपसी सहयोग का निर्णय भी शामिल किया गया है।

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि भोपाल घोषणा पत्र के माध्यम से मध्यप्रदेश और भोपाल की छवि में पूरे विश्व में निखार आयेगा। मुख्य सचिव बर्णवाल ने मध्यप्रदेश की ओर से केन्द्र सरकार का भी आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विभिन्न देशों के डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिक्स देश के प्रतिनिधियों और अन्य डेलिगेट्स समेत केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का स्वागत किया और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस अभिनव आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

भोपाल में सम्मेलन के दौरान 6 और 7 अगस्त को भोपाल में 'ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव' का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक एवं लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से प्रस्तुत की गई 'अमृतस्य मध्यप्रदेश' नृत्य नाटिका रही। 35 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और मध्यप्रदेश की शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय नृत्य परंपराओं के माध्यम से राज्य की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत प्रदर्शन किया।