कोलकाता। दार्जिलिंग में गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशास

राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव

राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव 

राज्य ने नियुक्ति को तुरंत रद्द करने की मांग की

गंगा प्रसाद

कोलकाता। दार्जिलिंग में गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) में गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति के मामले को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति को तुरत रद्द करने की मांग की है। केंद्र सरकार राज्य सरकार की मांग को दरकिनार करने पर अमादा है। 

केंद्र सरकार ने जीपीएस में गोरखा वार्ता कार के रूप में अवकाशप्रात आइपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को नियुक्त किया है। वे दार्जिलिंग तराई, डूअर्स के इलाकों में गोरखाओं से संबंधित मामले पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और गोरखा संगठनों से बातचीत करेंगे व समन्वय स्थापित करेंगे।राज्य सरकार को पंकज कुमार सिंह की नियुक्ति पर आपत्ति है और वह उनकी नियुक्ति को रद्द करवाना चाहती है। राज्य सरकार को इस बात से नाराजगी है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार कोई सलाह मशविरा किए गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति कर दी। यह केंद्र सरकार का राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है। 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ा पत्र लिखकर विरोध जताया है और गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति को तुरत रद्द करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि उनके शासनकाल में दार्जिलिंग के तराई और डूअर्स के इलाकों में शांति स्थापित हुई है और विकास हुआ है । उनके सत्ता में आने के बाद 18 जुलाई 2011 को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच बातचीत के बाद जीपीएस का गठन किया गया।

जानकारों का कहना है कि राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति मायने रखता है। 

इधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर केंद्र सरकार की ओर से दार्जिलिंग के तराई और डूअर्स के इलाकों में किए जाने वाले विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य सरकार की मांग की आलोचना की और कहा कि ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में गोरखा वार्ताकार की नियुक्ति को मुद्दा बनाना चाहती हैं ।