₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस,सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खबर पर मचा बड़ा कानूनी बवाल!
जबलपुर में बीजेपी विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कारोबारी महेंद्र गोयनका ने अपने खिलाफ भ्रामक और मानहानिकारक खबर प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए संजय पाठक को ₹5 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर के अधिवक्ता आर्यन उर्मलिया की ओर से 10 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
वेब पोर्टल की खबर पर विवाद
नोटिस न्यूज वेब पोर्टल yashbharat.com के मालिक, संपादक और प्रकाशक विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के साथ संवाददाता उषा पमनानी को भेजा गया है। विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को प्रकाशित एक खबर से हुई, जिसमें महेंद्र गोयनका को धोखाधड़ी और साजिश से जोड़कर पेश किए जाने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
नोटिस के मुताबिक, खबर में सुप्रीम कोर्ट के 7 अगस्त 2026 के आदेश का कथित तौर पर गलत और भ्रामक उल्लेख किया गया। यह आदेश SLP (C) No. 26908/2025 – Euro Pratik Ispat (India) Private Limited vs Geomin Industries (India) Private Limited एवं अन्य मामले से संबंधित है।
आदेश में क्या कहा गया?
नोटिस में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल जबलपुर की कमर्शियल कोर्ट को आदेश 39 नियम 1 और 2 CPC के तहत लंबित आवेदन पर दो महीने में फैसला करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की और सभी पक्षों के अधिकार कमर्शियल कोर्ट के समक्ष खुले रखे।
खबर के शब्दों पर आपत्ति
महेंद्र गोयनका की ओर से आरोप लगाया गया है कि खबर के शीर्षक में “धोखाधड़ी के आरोपी महेंद्र गोयनका” और खबर के भीतर “हर स्तर पर धोखाधड़ी और साजिश” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। नोटिस के मुताबिक, इससे पाठकों के बीच यह गलत धारणा बनी कि सुप्रीम कोर्ट ने गोयनका के खिलाफ धोखाधड़ी की पुष्टि की है।
48 घंटे में हटाने की मांग
कानूनी नोटिस में विवादित खबर, सोशल मीडिया पोस्ट, थंबनेल और डिजिटल लिंक को 48 घंटे के भीतर हटाने या सुधारने की मांग की गई है। साथ ही, खबर की प्रमुखता के समान स्थान पर बिना शर्त लिखित माफी और स्पष्ट सुधार प्रकाशित करने को कहा गया है।
₹5 करोड़ की क्षतिपूर्ति
नोटिस में प्रतिष्ठा को कथित रूप से पहुंचे नुकसान के लिए ₹5 करोड़ की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। इसके अलावा खबर से जुड़े ड्राफ्ट, संपादकीय रिकॉर्ड, ई-मेल, व्हाट्सऐप बातचीत और CMS रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की हिदायत भी दी गई है।
कार्रवाई की चेतावनी
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि 48 घंटे के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर दीवानी मानहानि, आपराधिक कार्रवाई और अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक कोलकाता से जुड़े एक अन्य मामले में कथित भ्रामक खबरों को लेकर भी अलग मानहानि नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।