भोपाल में खामेनेई की याद में ताज़ियती मजलिस, लगे अमेरिका-इजराइल विरोधी नारे
भोपाल के करोंद स्थित मस्जिद-ए-आले मोहम्मद में रविवार को अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की याद में ‘मजलिस-ए-ताज़ियत व इस्तेकामत’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान धर्मगुरुओं ने अयातुल्लाह खामेनेई के जीवन, उनके संघर्ष और इस्लामी क्रांति में निभाई गई उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने अमेरिका और इजराइल के विरोध में नारे भी लगाए।
कठिन परिस्थितियों एवं यातनाओं का सामना करना पड़ा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना गुलाम हुसैन ने कहा कि अयातुल्लाह खामेनेई ने इस्लामी क्रांति के शुरुआती दौर से ही सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि समय के साथ वे इमाम खुमैनी के नेतृत्व से जुड़े और क्रांति से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनके अनुसार, क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण खामेनेई को कई बार गिरफ्तार किया गया, जेल में रखा गया और उन्हें लगातार कठिन परिस्थितियों एवं यातनाओं का सामना करना पड़ा।
पीछे नहीं हटे और अपने विचारों पर अडिग रहे..
मौलाना ने कहा कि इस्लामी क्रांति से करीब तीन वर्ष पहले उन्हें शहर बदर यानी निर्वासन की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि उस समय यह आदेश पूरी तरह लागू नहीं हो पाया, लेकिन इसके बावजूद वे लंबे समय तक जेल में रहे और विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाएं झेलते रहे। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और दमन के बावजूद अयातुल्लाह खामेनेई अपने उद्देश्य से कभी पीछे नहीं हटे और अपने विचारों पर अडिग रहे।
अयातुल्लाह खामेनेई के जीवन एवं संघर्ष को याद किया
सभा में मौजूद अन्य धर्मगुरुओं ने भी उनके संघर्ष, नेतृत्व और वैचारिक प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में मौलाना सैयद जौन आबदी, मौलाना सैयद शहकार हुसैन जैदी और मौलाना सैयद अजहर हुसैन रिजवी सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
इस आयोजन का संचालन इंतेजामिया कमेटी वा मोमिनीन-ए-करोंद, भोपाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की और अयातुल्लाह खामेनेई के जीवन एवं संघर्ष को याद किया।