कोलकाता। भाजपा विरोधी पार्टियों ने अपने सवालों से

सवालों से घिरे राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी

सवालों से घिरे राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी 

विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे पाए चुनाव अधिकार

कोलकाता। भाजपा विरोधी पार्टियों ने अपने सवालों से राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें उनके सवालों का जबाव तो नहीं मिला, मिला केवल मुख्य चुनाव अधिकारी का यह आश्वासन कि एसआइआर के दौरान वोटर लिस्ट से किसी भी योग्य वोटर का नाम नहीं हटेगा। वोटर लिस्ट सौ प्रतिशत बिना सही होगा। विदेशियों को वोट देने का अधिकार नहीं है, वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी का नाम न हीं होगा।  सूत्रों का कहना है कि राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के साथ राजनीतिक पार्टियों की बैठक में टीएमसी के ओर से मौजूद कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हाकिम और मंत्री अरुप विश्वास ने उठाया कि 2002 में एसआइआर का कार्य दो साल में पूरा हुआ था। वही काम इस बार दो महीने में कैसे पूरा होगा। इस काम के लिए इतनी हड़बड़ी क्यों। नागरिकता की जांच किस तरह की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि वोटर लिस्ट से एक भी वैध वोटर का नाम हटेगा तो उसका कड़ा विरोध होगा। किसी पार्टी का नाम लिए बिना मंत्री अरुप विश्वास ने कहा कि एक पार्टी कहने पर साधारण गरीब लोगो के वोट देने के अधिकार को छीन लेने की साजिश हो रही है। घुमाफिरा कर एनआरसी को लागू करने की परिस्थिति तैयार की जा रही है। एसआइआर के शुरू करने के पहले से ही वह पार्टी एनसीआर और सीएए की लिए प्रचार कर रही हैं और कैंप खोल रही है। इसके कारण साधारण लोगों में भय उत्पन्न हो रहा है और आत्महत्या की घटना होने लगी है।   सूत्रों के मुताबिक माकपा की ओर से सुजन चक्रवर्ती और शमिर लाहिड़ी ने सवाल उठाया कि एसआईआर के लिए कागजातों की बनाई गई 12 सूची क्या नागरिकता का प्रमाण है। आधार का क्या होगा। माकपा नेताओं ने पूछा कि किस आधार पर बांग्लाभाषी को बांग्लादेशी बता कर विदेशी बताया जा रहा है। 2002 में तैयार वोटर लिस्ट में गड़बड़ी नहीं थी, इसकी क्या गारंटी है। क्या उस वोटर लिस्ट में मृत व्यक्तियों के नाम न हीं थे या जाली वोटर का नाम नहीं था। कांग्रेस की ओर से मौजूद आशुतोष चट्टोपाध्याय और प्रसन्नजीत बसु ने माकपा नेताओं का समर्थन किया और सवाल किया कि जल्दबाजी में वोटर लिस्ट तैयार करने से सबसे अधिक गरीब वोटरों का अहित होगा। दोनों नेताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि वह चुनाव आयोग को आगे कर अपना लक्ष्य पूरा करना चाहती है।  सूत्रों के अनुसार भाजपा के शिशिर बाजोरिया और प्रताप वंद्योपाध्याय ने कहा कि एक भी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा तो टीएमसी क्यों चिंतित है। उन्होंने कहा 1917 और 1919 में वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी। भाजपा चाहती है कि वोटर लिस्ट से नकली वोटरों का नाम हटाया जाए।  सूत्रों का कहन है कि मुख्य चुनाव अधिकारी ने उठे सवालों का जवाब देने से बचते हुए जोर देकर यह भरोसा दिया कि एक भी योग्य वोटर का नाम वोटर लिस्ट ने नहीं कटेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में एसआइआर के लिए जितना समय दिया गया था, उससे अधिक समय पश्चिम बंगाल में दिया जा रहा है। राज्य में एसआइआर से लिए 80 हजार बीएलओ और आठ हजार सहायक बीएलओ नियुक्त किए गए हैं। एसआइआर के लिए शुरुआती कार्य पूरे किए जा चुके हैं। बीएलओ घर-घर जाएंगे और जानकारी इकट्ठा करेंगे। किसी को भी भ्रम में रहने और जरने की जरूरत नहीं है।