बांके बिहारी मंदिर का 54 साल बाद खुला खजाना
बांके बिहारी मंदिर का 54 साल बाद खुला खजाना
गर्भगृह के नीचे रखे बक्से मिले खाली, 3 कलश और एक छत्र भी मिला
मथुरा। बांके बिहारी मंदिर का 160 साल पुराना खजाना धनतेरस के दिन 54 साल बाद खोला गया। लेकिन गर्भगृह के नीचे स्थित विशेष कपाट में रखे बक्से खाली मिले।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति की देखरेख में मंदिर का खजाना खोलने की पूरी प्रक्रिया पूरी की गयी। इस दौरान सुरक्षा विभाग और वन विभाग की टीम मौजूद रही। मंदिर के खुले खजाने में करीब साढ़े तीन घंटे तक खोजबीन के बाद बक्सों में बंद कुछ बर्तन, खाली संदूक, एक छोटा चांदी का छत्र और जेवरात के कुछ खाली बाक्स मिले। इतने वर्षों बाद खजाना का दरवाजा खुला तो काफी मलबा भी निकला। मंदिर खुलने का समय होने के कारण फिर से खजाने के दरवाजे पर सील लगा दी गई। रविवार को फिर से खजाना खोला जाएगा। मंदिर की खजाने से मिली वस्तुएं तोशखाना में सुरक्षित रख दी गईं। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर का खजाना शनिवार को 54 साल बाद खोला गया। ये खजाना 160 साल पुराना है। अभी तक की सर्चिंग में टीम को 2 बक्से (एक लोहे और दूसरा लकड़ी का) और 3 कलश मिले हैं। लकड़ी के बक्से के अंदर ज्वेलरी के छोटे-बड़े कई खाली डिब्बे मिले। 4-5 ताले भी निकले हैं। बक्से में 2 फरवरी, 1970 का लिखा हुआ एक पत्र और एक चांदी का छोटा छत्र भी मिला।
खजाने में तीन बड़ी पीतल की डेग, तीन कलश, एक परात, चार बड़े पत्थर गोलाकार डेढ़ फीट ऊंचाई के, एक लकड़ी का तख्ता तो एक फीट ऊंचाई का था मिला। दो पीतल के छोटे घंटे भी मिले। इसी कमरे में फर्श में रखे पत्थर को हटाया गया तो उसमें नीचे जाने की सीढ़ी दिखाई दी। करीब सात सीढ़ी के बाद नीचे तीन गुणा चार फीट का एक छोटा कमरा मिला। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर कुछ नहीं कहा है।
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में परिसर में ही खजाना है। वर्ष 1971 में अंतिम बार खजाना खोला गया था और उसमें रखे ठाकुर जी के चढ़ावे के जेवरात व अन्य वस्तुएं एक बक्से में रखी गई थीं। बाद में भूतेश्वर स्थित भारतीय स्टेट बैंक में एक लाकर लेकर वह बक्सा लाकर में रख दिया गया। तब से खजाने में सील लगी थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई उच प्रबंधन समिति के निर्देश पर शनिवार को फिर खजाना खोला गया। मंदिर के पट बंद होने के बाद सिविल जज जूनियर डिवीजन शिप्रा दुबे की अगुवाई में अधिकारियों की टीम शनिवार दोपहर करीब एक बजे मंदिर पहुंची। करीब डेढ़ बजे खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई।
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के 54 साल बाद खोले गये 160 साल पुराने इस खजाने को लेकर बहुत उम्मीदें थीं। पहले दरवाजे को जब काटा गया, तो एक लोहे, एक लकड़ी का बॉक्स और 3 कलश मिले। जब बॉक्स खोले गए, तो उसके अंदर ज्वेलरी बॉक्स मिले। लोगों में खुशी हुई। लेकिन, जब ज्वेलरी बॉक्स खोले गए, तो वो खाली थे। खजाने तक पहुंचने के लिए गेट में एंट्री करने से पहले कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने दीपक जलाया। अफसरों की मौजूदगी में दरवाजे को ग्राइंडर से काटा गया। इसके बाद खजाने की पहचान के लिए तय कमेटी के सारे मेंबर एक-एक करके अंदर गए। कमेटी में सिविल जज, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, सीओ वृंदावन, सीओ सदर और चारों गोस्वामी शामिल रहे। सभी ने मास्क लगाकर एंट्री की। कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया- अभी किसी को भी नहीं पता कि खजाने का असली दरवाजा कहां है? हमने सुना था कि दरवाजा फर्श के अंदर है। उसके ऊपर एक पत्थर रखा हुआ है। वो अभी किसी को नहीं मिला है। इस बीच दम घुटने से पुजारी बाहर निकल आये। उन्होंने कहा कि धूल से हमारी हालत खराब हो गई, इसलिए हम बाहर आ गए। अंदर इतनी ज्यादा मिट्टी है। जैसे किसी ने जानबूझकर भरा हो। पहले दिन की सर्चिंग पूरी होने के बाद सीओ सदर संदीप कुमार सिंह ने बताया- अंदर जो चीजें मिली हैं। उनकी लिस्टिंग कर ली गई है। अभी जो सामान जहां था, वहीं पर रखा हुआ है। खजाने के लिए दोबारा कब गेट खोला जाएगा, यह समिति की मीटिंग के बाद तय होगा।
गर्भगृह के पास बने जिस कमरे में खजाना रखा था, उसके अंदर सांप-बिच्छू होने की आशंका जताई गई थी। इसलिए वन विभाग की टीम स्नैक कैचर लेकर पहुंची थी। टीम की सर्चिंग के दौरान 2 सांप के बच्चे भी मिले। बांके बिहारी का खजाना खोलने का निर्णय 29 सितंबर को लिया गया था। 17 अक्टूबर को कमेटी के सचिव और डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने खजाना खोलने का आदेश जारी किया था।
मंदिर के सेवायतों ने खजाना खोले जाने के दौरान सुरक्षा प्रोटोकाल का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि उच्च प्रबंधन समिति द्वारा गठित अधिकारियों की टीम ने जांच के सारे नियमों को ताक पर रख दिया। मंदिर के खजाने का पहला दरवाजा तोड़ने के दौरान अधिकारियों और मंदिर सेवायतों के अलावा कुछ कर्मचारी भी पहुंचे लेकिन उनकी जांच नहीं की गई। टीम के सदस्य भी कई बार आते-जाते रहे। मंदिर सेवायत रजत गोस्वामी व समिति सदस्य दिनेश गोस्वामी के बीच बहस भी हो गई। रजत गोस्वामी ने कहा कि जब आप लोग खजाने में अंदर जा रहे हैं और बाहर निकल रहे हैं, तो चेकिंग क्यों नहीं हो रही। खजाना में बहुमूल्य आभूषण निकलने तो उनके चोरी होने की जिम्मेदारी किसकी होगी ?
बताया जा रहा है कि अंतिम बार खजाना आधिकारिक रूप से 1971 में खुला था, लेकिन लकड़ी के बाक्स में एक पुराना समाचार पत्र मिला है। सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि इस पर फरवरी 1972 लिखा है। 1971 के बाद खजाने का दरवाजा नहीं खुला। फिर 1972 का अखबार वहां कैसे पहुंचा। इसे लेकर दिनेश गोस्वामी कोई जवाब नहीं दे सके।