बालाघाट आईटीआई के अधिकारियों ने प्रमोशन सूची में अ

प्रमोशन में अनदेखी का आरोप: बालाघाट ITI के ट्रेनिंग ऑफिसर्स ने उठाए सवाल, सीआर मूल्यांकन पर नाराजगी

बालाघाट। कौशल विकास संचालनालय की ओर से हाल ही में आईटीआई के ट्रेनिंग ऑफिसर्स (TO) की पदोन्नति सूची जारी की गई, जिसके बाद बालाघाट आईटीआई में तैनात कुछ अधिकारियों में नाराजगी सामने आई है। कई ट्रेनिंग ऑफिसर्स ने आरोप लगाया है कि प्रमोशन प्रक्रिया में गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर (Confidential Report) के मूल्यांकन में निर्धारित नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

ट्रेनिंग ऑफिसर्स का कहना है कि वर्षों तक पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ सेवाएं देने के बावजूद उन्हें पदोन्नति सूची में स्थान नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि सीआर में कम अंक दिखाकर उनके प्रमोशन के अवसर को प्रभावित किया गया है।

बालाघाट आईटीआई के आठ ट्रेनिंग ऑफिसर्स ने इस मामले में आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रमोशन केवल कागजी मूल्यांकन के आधार पर नहीं, बल्कि कर्मचारियों की पूरी सेवा अवधि, कार्य प्रदर्शन और योगदान को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए।

वरिष्ठ ट्रेनिंग ऑफिसर दशरथ बिसेन ने जताई नाराजगी

बालाघाट आईटीआई के सबसे वरिष्ठ ट्रेनिंग ऑफिसर दशरथ बिसेन ने प्रमोशन सूची में अपना नाम नहीं होने पर निराशा जाहिर की है। उन्होंने बताया कि वह आगामी तीन महीने में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।

दशरथ बिसेन का कहना है कि उनके पूरे सेवाकाल में उन्हें कभी कोई शो-कॉज नोटिस नहीं मिला और उनकी सेवा रिकॉर्ड हमेशा बेहतर रहा है। इसके बावजूद सीआर में कम अंक का हवाला देकर उन्हें पदोन्नति से वंचित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि आईटीआई के कई ऐसे ट्रेनिंग ऑफिसर्स हैं, जिनके प्रशिक्षण से तैयार हुए विद्यार्थियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को नजरअंदाज किया जाना उचित नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्ति से लेकर अब तक उनकी गोपनीय चरित्रावली निष्कलंक रही है, फिर भी प्रमोशन प्रक्रिया में उन्हें पीछे कर दिया गया।

महिला ट्रेनिंग ऑफिसर्स ने भी उठाई आवाज

बालाघाट आईटीआई की महिला ट्रेनिंग ऑफिसर रत्नमाला गनवीर ने भी प्रमोशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में पांच महिला ट्रेनिंग ऑफिसर कार्यरत हैं, लेकिन किसी का भी नाम पदोन्नति सूची में शामिल नहीं किया गया।

रत्नमाला गनवीर का कहना है कि प्रमोशन सूची में उनका नाम ऊपर था और वे पात्रता पूरी करती थीं, इसके बावजूद उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों के साथ भी समान अवसर और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीआर मूल्यांकन के आधार पर लिए गए फैसले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और विभाग को इस मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

अधिकारियों को पत्र लिखा, कोर्ट जाने की तैयारी

ट्रेनिंग ऑफिसर दशरथ बिसेन ने बताया कि प्रमोशन में हुई कथित अनदेखी को लेकर उन्होंने विभाग के अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजे हैं। उन्होंने प्राचार्य से लेकर सचिव स्तर तक अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

उनका कहना है कि यदि उनकी शिकायत का उचित समाधान नहीं किया गया तो वह न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।

फिलहाल ट्रेनिंग ऑफिसर्स की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें विभाग की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रमोशन प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।