पाक में आसिम मुनीर बने कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज, मिलेंगे कई और विशेषाधिकार
Asim Munir : नई दिल्ली। पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर का कद एक बार फिर बढ़ गया। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की संसद ने बहुचर्चित 27वां संविधान विधेयक पारित कर दिया है। इसके तहत सेना प्रमुख के असीमित ताकत मिल गई है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब तीनों सेनाओं के प्रमुख होंगे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अगुआई में ये सारे बदलाव लागू होंगे। इस नए कानून से सेना प्रमुख को सुपरपावर मिल जाएगी जो कि तख्तापलट को संवैधानिक मंजूरी देने के बराबर है।
इस नए पद का नाम रक्षा बलों के प्रमुख चीफ आफ डिफेंस फोर्सेज होगा। इस नए संशोधन विधेयक के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर आसिम मुनीर को इस पद पर नियुक्त करेंगे। नए प्रावधान के तहत यह भी प्रस्तावित है कि देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर सेना, नौसेना और वायु प्रमुखों की नियुक्ति करेंगे। इसके अलावा सेना के प्रमुख रक्षा बलों के प्रमुख के रूप में भी कार्य करेंगे।
क्यों लिया यह फैसला?
सरकार की ओर से बताया गया कि उसने यह फैसला सेना के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने के लिए लिया है। इससे तीनों सेनाएं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) सिंगल कमांड के अंतर्गत काम कर सके। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में भारत से बुरी तरह हारने के बाद पाकिस्तान ने सबक के तौर पर यह फैसला लिया है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था। पिछले ही महीने एयर मार्शल एपी सिंह ने बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान F-16 फाइटर जेट समेत पाकिस्तान के कई सैन्य लड़ाकू विमान धराशायी हो गए थे। आखिर में थककर पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने की गुजारिश की थी, जिसके बाद भारत ने हमले बंद कर दिए थे।
आसिम मुनीर के पास होंगी कई शक्तियां
यह संशोधन सेना प्रमुख को असीमित ताकत देगा। जो एक तरह से तख्तापलट को संवैधानिक मंजूरी देने जैसा है। मसौदे के अनुसार मुनीर के पास परमाणु कंट्रोल का भी हक होगा। यह कानून सरकार को सशस्त्र बलों से फील्ड मार्शल, वायुसेना के मार्शल और बेड़े के एडमिरल के पदों पर पदोन्नत करने का अधिकार भी देता है। इसमें फील्ड मार्शल का पद आजीवन बना रहेगा।
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