छतरपुर कलेक्टर द्वारा अनंत अंबानी की अगवानी किए जा

अनंत अंबानी की अगवानी पर बवाल, पूर्व मंत्री राजा पटैरिया ने कलेक्टर पर उठाए सवाल; जांच और कार्रवाई की मांग

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा खजुराहो एयरपोर्ट पर उद्योगपति अनंत अंबानी की अगवानी किए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजा पटैरिया ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। उन्होंने राज्यपाल और मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में लिखा गया उनका शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

एक निजी उद्योगपति की अगवानी की

मीडिया से बातचीत में राजा पटैरिया ने कहा कि यदि किसी जिला कलेक्टर ने एक निजी उद्योगपति की अगवानी की है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इसके लिए शासन की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या प्रोटोकॉल था या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अनंत अंबानी को किसी प्रकार का विशेष राजकीय दर्जा प्राप्त है, जिसके आधार पर कलेक्टर एयरपोर्ट पहुंचे। यदि ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो यह अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध माना जाना चाहिए और इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश का प्रशासन आम जनता की समस्याओं की तुलना में प्रभावशाली लोगों को अधिक प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर किसान और आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और अधिकारियों से मिलने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर एक उद्योगपति के स्वागत के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।

संवैधानिक स्तर तक आवाज उठाएंगे

राजा पटैरिया ने कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे बुंदेलखंड में जनआंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि वीआईपी संस्कृति और प्रशासन में कथित पक्षपात के खिलाफ वे सड़क से लेकर संवैधानिक स्तर तक आवाज उठाएंगे।

गौरतलब है कि यह मामला 2 जुलाई का है, जब छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल के खजुराहो एयरपोर्ट पर अनंत अंबानी के स्वागत के लिए मौजूद होने की खबरें सामने आई थीं। फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।