RGPV में प्रशासनिक सर्जरी, प्रो. अर्चना तिवारी से छीनी गईं अहम जिम्मेदारियां!
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जून-जुलाई 2026 की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी प्रो. अर्चना तिवारी से वापस लेकर प्रो. संजीव शर्मा को सौंप दी है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रो. अर्चना तिवारी को परीक्षा संचालन से जुड़े सभी कार्यों और जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्वों से भी हटा दिया गया
विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव (प्रशासन) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रो. अर्चना तिवारी को केवल परीक्षा नियंत्रक के पद से ही नहीं हटाया गया, बल्कि उन्हें स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रभारी निदेशक पद से भी मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल को अगले आदेश तक प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा उन्हें डायरेक्टर, आईक्यूएसी (IQAC) सहित सभी अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्वों से भी हटा दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से प्रो. संजीव शर्मा को दोबारा परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जून-जुलाई सत्र की परीक्षाओं के संचालन में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए, इसलिए यह बदलाव तत्काल प्रभाव से किया गया है।
आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है
इस प्रशासनिक बदलाव के साथ ही प्रो. अर्चना तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के संकेत भी मिले हैं। आदेश की प्रतिलिपि में उपकुलसचिव (स्थापना) को निर्देश दिया गया है कि उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने, जांच अधिकारी नियुक्त करने और आरोप पत्र जारी करने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया जाए। इससे साफ है कि मामला केवल पद परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
फैसले को लेकर चर्चाएं तेज
जानकारी के अनुसार यह फैसला विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति द्वारा सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। समिति ने प्रथम दृष्टया माना है कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने, परीक्षा संचालन में प्रशासनिक नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन में गंभीर कमियां सामने आई हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश में विभागीय जांच के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया है। आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।