नक्सली पृष्ठभूमि वाले नेता को कांग्रेस की कमान! जातीय समीकरण से उरांव समाज में असंतोष, संगठन में नई खाई उभरी
नीतीश भारती/न्यूज11 भारत
मनिका/डेस्क: जिला कांग्रेस को नया नेतृत्व मिल गया है. मटलोंग (मनिका) निवासी अनुभवी नेता कामेश्वर यादव को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए यादव की नियुक्ति को जहां संगठन में नई ऊर्जा का संकेत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह फैसला नक्सली पृष्ठभूमि, जातिगत असंतुलन और विवादित नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी चर्चा का विषय बन गया है.
नक्सल कांड की छाया फिर हुई ताज़ा
कामेश्वर यादव मनिका थाना कांड संख्या 07/2009 के नामजद अभियुक्त रह चुके हैं. यह घटना के बाद उन पर नक्सलियों से संपर्क और सहयोग करने के गंभीर आरोप लगे थे.अब उसी व्यक्ति का कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल में जिला अध्यक्ष बनना, संगठन की नीति और दिशा पर कई प्रश्न खड़े कर रहा है.
विधायक रामचंद्र सिंह ने “चाणक्य नीति” के तहत संगठन में तीन अलग-अलग जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की —
- युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष – अमित यादव
- सेवा दल जिलाध्यक्ष – बृंद बिहारी यादव
- मुख्य कांग्रेस जिलाध्यक्ष – कामेश्वर यादव
तीनों पद यादव समाज के नेताओं के पास हैं. जबकि मनिका विधानसभा में यादव समुदाय का वोट लगभग 14,000, और उरांव समुदाय का वोट बैंक लगभग 70,000 है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति संगठनात्मक संतुलन से अधिक जातिगत प्रयोग लगती है, जो भविष्य में कांग्रेस के लिए जोखिम भरा दांव साबित हो सकती है.
ST वर्ग में बढ़ता विरोध और संगठनात्मक असंतुलन
पूर्व जिलाध्यक्ष मुनेश्वर उरांव को हटाकर गुंजर उरांव को कार्यकारी जिलाध्यक्ष बनाया गया था,लेकिन कुछ ही महीनों में उन्हें भी पद से हटा दिया गया.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया “संगठन के साथ अन्याय” है. ST, SC और अल्पसंख्यक वर्ग में यह संदेश गया है कि कांग्रेस में अब जातीय समीकरण, योग्यता पर हावी हो गया है.
कामेश्वर यादव की प्रतिक्रिया
कामेश्वर यादव ने कहा, “कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाज़ी नहीं चलेगी. मेरा उद्देश्य प्रखंड और पंचायत स्तर तक संगठन को मज़बूत करना और हर कार्यकर्ता को सम्मान देना है.”
उन्होंने दावा किया कि वे “सभी वर्गों को साथ लेकर चलने” की नीति पर विश्वास करते हैं.
वहीं विरोधी इसे राजनीतिक पुनर्वास और रणनीतिक प्रयोग बता रहे हैं.
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