Jaipur SMS Hospital Fire Update: जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात आग लग गई, जिससे कई मरीजों की मौत हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हॉस्पिटल स्टाफ ने 8 मरीजों के मृत होने की सूचना दी, जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक 6 मौतों की पुष्टि की है।
सरकार की पहली कार्रवाई
हादसे के तुरंत बाद राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले SMS हॉस्पिटल अधीक्षक और ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज को हटाया गया। एक्सईएन निलंबित को निलंबित किया गया। फायर सेफ्टी कंपनी पर FIR दर्ज कराने के आदेश दिए गए।
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि, "हादसे का शिकार मरीज वेंटिलेटर पर थे। उन्हें वेंटिलेटर से हटाया जाता तो हादसा होने की संभावना थी।"
सरकार ने मृतक आश्रितों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है।
सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की दुखद घटना ने सभी को व्यथित किया है।
सभी मृतकों के परिजनों को ₹10-10 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इस हृदयविदारक क्षण में प्रदेश सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ी है।
हॉस्पिटल प्रशासन और फायर ब्रिगेड की प्रारंभिक जांच में आग लगने के तीन मुख्य कारण सामने आए हैं:
इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट – आईसीयू में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों और वायरिंग में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई।
ऑक्सीजन सिलेंडर से रिसाव – ट्रॉमा सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडरों के पास आग फैलने की संभावना।
फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी – हॉस्पिटल में पर्याप्त फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं होने की रिपोर्ट मिली।
फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। हालांकि इस दौरान कई मरीज वेंटिलेटर पर होने के कारण सुरक्षित स्थान पर ले जाने में दिक्कत आई।
6 सदस्यीय कमेटी का गठन
हादसे की गहन जांच के लिए शासन स्तर पर 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें फायर सेफ्टी, मेडिकल और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। साथ ही FSL की टीम मौके पर पहुंची और सभी जरूरी सबूत इकट्ठे किए।
हाईकोर्ट ने उठाए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सवाल
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस आग हादसे पर मौखिक टिप्पणी करते हुए सरकारी बिल्डिंग की इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए।
जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक जैन की कोर्ट में झालावाड़ स्कूल हादसे से संबंधित स्वप्रेरणा याचिका पर सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने कहा कि, "सरकारी इमारतों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कई जानलेवा हादसों का कारण बन सकती है।"
मृतकों और आश्रितों के लिए राहत
सरकार ने मृतक आश्रितों के लिए तुरंत राहत पैकेज की घोषणा की। प्रत्येक परिवार को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा, प्रभावित मरीजों के इलाज और पुनर्वास की पूरा ध्यान रखा जाएगा।
अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी
हादसे के बाद हॉस्पिटल प्रशासन की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीयू में ऑक्सीजन सिलेंडर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सही तरीके से व्यवस्थित नहीं थे। फायर अलार्म और इमरजेंसी प्लानिंग पूरी तरह से अनुपस्थित थी। हॉस्पिटल में सुरक्षा उपायों की नियमित निगरानी नहीं हो रही थी।
इस घटना ने पूरे राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी पर नई बहस को जन्म दिया है।
आग पर नियंत्रण और अगली कार्रवाई
Jaipur SMS Hospital Fire Update: फायर ब्रिगेड ने आग पर लगभग दो घंटे में काबू पाया, लेकिन तब तक कई मरीजों की मौत हो चुकी थी। अब सरकार ने ट्रॉमा सेंटर में सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों और ऑक्सीजन सिलेंडरों की जांच शुरू कर दी है। हॉस्पिटल की संपूर्ण फायर सेफ्टी व्यवस्था को जांच के लिए सील किया गया है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज करने के आदेश जारी किए।
जयपुर SMS हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में आग: 8 मरीजों की दर्दनाक मौत
Jaipur SMS Hospital fire: जयपुर के प्रसिद्ध सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात भयावह आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई। हादसे में 3 महिलाएं भी शामिल हैं। आग की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई। यह घटना पूरे शहर में शोक और चिंता का विषय बनी हुई है।
जयपुर SMS हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में आग
रविवार रात 11:20 बजे SMS हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर में आग लगी। इस स्टोर में पेपर, आईसीयू का जरूरी सामान और ब्लड सैंपलर ट्यूब रखे हुए थे। पूरी खबर...