“शराब के आरोपों पर सियासी तूफान: गवर्नर ने मिले बीजेपी नेता, जांच की मांग तेज”
पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान पर विधानसभा सत्र के दौरान शराब के नशे में होने के आरोप लगे। इस मुद्दे ने न केवल सियासी तापमान बढ़ाया, बल्कि विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका भी दे दिया। रविवार को इस मामले को लेकर प्रदेश के बीजेपी नेता सुनील जाखड़ गवर्नर गुलाब चाँद कटारिया से मिले |
क्या है पूरा मामला?
पंजाब विधानसभा के हालिया सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नशे की हालत में सदन में पहुंचे थे। इस आरोप के बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ और कार्यवाही बाधित हो गई।
विपक्ष ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र की गरिमा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही, सभी विधायकों का अल्कोहल और डोप टेस्ट कराने की मांग भी उठाई गई।
सुनील जाखड़ ने किया तीखा हमला
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष जाखड़ ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मान को घेरते हुए कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे “गंभीर और शर्मनाक” बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। राज्यपाल कटारिया से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री मान को इलाज के लिए डी-एडिक्शन सेंटर भेज देना चाहिए |
जाखड़ ने यह भी संकेत दिया कि सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
विपक्ष की मांग: टेस्ट कराओ, सच बताओ
कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए अल्कोहल टेस्ट कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री निर्दोष हैं, तो जांच से बचने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए।
कुछ नेताओं ने तो यहां तक कहा कि पूरे सदन के सदस्यों का टेस्ट कराया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहा है।
राजनीतिक तापमान चढ़ा
इस विवाद ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्ष सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे सियासी ड्रामा बता रहा है।