Sachin Appeal Pataudi Legacy Save: भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने पटौदी ट्रॉफी को लेकर उठे विवाद के बीच खुद हस्तक्षेप किया है और BCCI तथा ECB के अधिकारियों से बातचीत कर पटौदी की विरासत को बनाए रखने की अपील की है।
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एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी पर विवाद, सचिन ने जताई आपत्ति...
हाल ही में रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का नाम ‘एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी’ रखा जाएगा, जिससे मौजूदा पटौदी ट्रॉफी को हटाया जाना था। यह निर्णय ECB की ओर से प्रस्तावित किया गया था, जिसे लेकर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों में विरोध शुरू हो गया।
इस विरोध के बीच सचिन तेंदुलकर ने आगे आकर पटौदी ट्रॉफी को बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने दोनों बोर्डों से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
ECB ने मानी तेंदुलकर की बात, पटौदी नाम बरकरार...
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर के आग्रह के बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने उनकी बात को गंभीरता से लिया है। बोर्ड अब इस सीरीज के विजेता कप्तान को स्वर्गीय मंसूर अली खान पटौदी के नाम पर एक विशेष ‘पटौदी पदक’ देने की योजना पर काम कर रहा है।
ECB के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में पटौदी कनेक्शन को किसी न किसी रूप में बरकरार रखा जाएगा।
कौन थे मंसूर अली खान पटौदी?
मंसूर अली खान पटौदी 21 साल की उम्र में भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तान बने थे। उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी भारत और इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके थे।
पटौदी ट्रॉफी की शुरुआत 2007 में भारत के पहले टेस्ट (1932) की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में की गई थी।
एंडरसन और तेंदुलकर – रिकॉर्ड के धनी...
सचिन तेंदुलकर
1. सबसे ज्यादा 200 टेस्ट मैच खेलने वाले खिलाड़ी।
2. टेस्ट में सबसे ज्यादा 15,921 रन बनाने का रिकॉर्ड।
जेम्स एंडरसन
1. 188 टेस्ट के साथ दूसरे सबसे ज्यादा टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी।
2. टेस्ट में 704 विकेट, जो इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।
3. एंडरसन ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी।
टेस्ट सीरीज कार्यक्रम...
भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी:
1. पहला टेस्ट: 20 जून, लीड्स
2. अंतिम टेस्ट: 31 जुलाई, ओवल, लंदन
भारत ने आखिरी बार 2007 में इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती थी। ऐसे में इस बार भारतीय टीम के पास इतिहास दोहराने का सुनहरा मौका है।