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RCB Victory Parade Stampede Report: RCB को ठहराया गया बेंगलुरु भगदड़ का दोषी, सरकार ने हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट!

RCB Victory Parade Stampede Report: बेंगलुरु में 3 जून 2025 को IPL का फाइनल मैच RCB और PBKS के बीच खेला गया था और 18 साल के लंबे इंतजार के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने इंडियन प्रीमियर लीग की ट्रॉफी अपने नाम की, इस ऐतिहासिक जीत ने देश भर के आरसीबी प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ा दी। लेकिन, बेंगलुरु में अगले दिन आयोजित विक्ट्री परेड के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति में 11 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद से ही इसका दोषी कौन है, इसकी लगातार जांच की जा रही हैं। Read More: Bengaluru Stampede 2025: बेंगलुरु भगदड़ मामला: चार गिरफ्तार, RCB और KSCA अधिकारी जांच के दायरे में बीते दिन गुरुवार को कर्नाटक सरकार की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें इस हादसे का जिम्मेदार RCB फ्रेंचाइजी को माना गया और इसमें विराट कोहली को भी दोषी ठहराया गया।

कर्नाटक सरकार का बयान आया सामने...

उन्होंने इस भगदड़ की जिम्मेदार RCB को मानते हुए उन्होंने कहा कि- "RCB चिन्नास्वामी में आयोजित विक्ट्री परेड के लिए सरकार से कोई अनुमति नहीं ली थी। भीड़ ज्यादा होने से भगदड़ मची। जिसमें 11 लोगों की जान गई और 50 घायल हुए।" हालांकि एक और बयान देते हुए कहा कि- अगर इस विक्ट्री परेड आयोजन को अचानक रद्द करते तो भी हिंसा भड़क सकती थी और शहर में कानून-व्यवस्था भी बिगड़ जाती।

15 जुलाई को सरकार ने हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट...

मंगलवार 15 जुलाई को कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में RCB की विक्ट्री परेड को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी। सरकार ने इसे गोपनीय रखने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ऐसी गोपनीयता के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है।

कर्नाटक के मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने कहा -

"जब भी कोई बड़ा आयोजन होता है, तो यह विभाग की जिम्मेदारी होती है और निश्चित रूप से चूक हुई है... युवा जानें गई हैं और हम इसे आसानी से नहीं ले सकते... हम कार्रवाई करेंगे..."

रिपोर्ट के 4 मुख्य बिंदु: -

RCB ने पुलिस को केवल सूचना दी, अनुमति नहीं ली...

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि RCB ने 3 जून को IPL जीतने के बाद विक्ट्री परेड की पुलिस को केवल सूचना दी थी, अनुमति नहीं ली । कानून के अनुसार, ऐसे सार्वजनिक आयोजनों के लिए कम से कम 7 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। पुलिस को भीड़ का अनुमान, सुरक्षा व्यवस्था या संभावित समस्याओं की जानकारी नहीं दी गई थी, इसलिए अनुमति नहीं दी गई।

सोशल मीडिया पर बिना पुलिस सलाह के सार्वजनिक निमंत्रण...

4 जून की सुबह 7:01 बजे RCB ने सोशल मीडिया पर फ्री एंट्री की घोषणा की और लोगों को परेड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद 8 बजे एक और पोस्ट और 8:55 बजे विराट कोहली का वीडियो पोस्ट किया गया। दोपहर 3:14 बजे पहली बार फ्री पास की जानकारी दी गई, जिससे भ्रम और गुस्सा फैला।

स्टेडियम की क्षमता से ज्यादा पहुंचे लोग...

रिपोर्ट में कहा गया कि - RCB की पोस्ट्स को 44 लाख से अधिक बार देखा गया। इसके चलते करीब 3 लाख लोग स्टेडियम और परेड रूट पर जुटे। बेंगलुरु मेट्रो के आंकड़ों के अनुसार, उस दिन 9.66 लाख यात्रियों ने मेट्रो का उपयोग किया, जो सामान्य से बहुत ज्यादा था। स्टेडियम की क्षमता सिर्फ 35,000 थी लेकिन गेटों पर भीड़ अनियंत्रित हो गई। लोगों ने गेट नंबर 1, 2 और 21 तोड़ दिए, कई अन्य गेटों पर भी भगदड़ की स्थिति बनी।

परेड को क्यों नहीं रोका गया?

रिपोर्ट में कहा गया कि - आयोजन को अचानक रद्द करने से हिंसा और दंगे भड़क सकते थे। इसी वजह से आयोजन को पूरी तरह रद्द नहीं किया गया, बल्कि समय कम किया गया और निगरानी बढ़ाई गई। यह निर्णय भीड़ की भयावह संख्या और सूचना की कमी को ध्यान में रखकर लिया गया।

आखिर क्या है मामला...

4 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर RCB की जीत की खुशी में विक्ट्री परेड निकाली गई थी। स्टेडियम में घुसने की कोशिश में लोगों ने दीवारें फांदनी शुरू कीं। हजारों की भीड़ गेट पर मौजूद थी और सड़कें पूरी तरह भर चुकी थीं। इस दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 11 लोगों की मौत और 33 लोग घायल हो गए थे।