अन्य
राहुल गांधी: ट्रम्प का टैरिफ इकोनॉमिक ब्लैकमेल, मोदी पर भी साधा निशाना
मोदी की कमजोरी न हो भारत की कीमत पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ के ऐलान के बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे भारत के खिलाफ "इकोनॉमिक ब्लैकमेल" कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि:"बेहतर होगा कि मोदी अपनी कमजोरियों को भारतीय लोगों के हितों पर हावी न होने दें।" राहुल गांधी, X पोस्ट में
भारत पर क्यों लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ?
ट्रम्प प्रशासन ने 30 जुलाई 2025 को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर कहा भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जो अमेरिका की नीति के खिलाफ है। इसके जवाब में भारत से अमेरिका आने वाले सभी उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। हालांकि कुछ मामलों में छूट दी जा सकती है, जैसे अगर सामान पहले से समुद्र में लदा हुआ हो।राहुल की X पोस्ट में क्या कहा गया?
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सीधे शब्दों में अमेरिका के टैरिफ फैसले की आलोचना की और कहा कि यह भारत सरकार को अनुचित व्यापार समझौते के लिए धमकाने जैसा है। यह एक आर्थिक दबाव की रणनीति (Economic Blackmail) है। सरकार को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए, किसी दबाव में नहीं आना चाहिए।डेड इकोनॉमी विवाद: राहुल का ट्रम्प को समर्थन?
3 अगस्त को ट्रम्प ने भारतीय अर्थव्यवस्था को "Dead Economy" कहा था। इस पर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी थी:"मुझे खुशी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सच बोला है। "भाजपा ने अडाणी की मदद करते हुए भारत की इकोनॉमी बर्बाद कर दी।"उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने नोटबंदी, खामियों वाला GST, असेंबल इन इंडिया फेल (मेक इन इंडिया पर तंज), MSMEs का नुकसान, किसानों का दमन और युवाओं का भविष्य खत्म कर दिया है।
भारत का जवाब: अपने हितों की रक्षा करेंगे
भारत सरकार ने अमेरिकी फैसले को अनुचित और एकतरफा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा"हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।"
25% टैरिफ का असर: कौन से सेक्टर होंगे प्रभावित?
टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इससे उनकी डिमांड घट सकती है। खासकर कपड़ा, फार्मा, जेम्स एंड ज्वैलरी, और ऑटो पार्ट्स सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन भारतीय एक्सपोर्टर्स ने कहा है कि"हमारे पास दुनिया के और भी बाजार हैं, अमेरिका अकेला विकल्प नहीं।"