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Bijapur : ‘लाल आतंक’ से मोहभंग, 22 लाख के इनामी 13 नक्सलियों ने किया संरेडर

समाज की मुख्यधारा में लौटे

बीजापुर (छत्तीसगढ़) – नक्सलवाद से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को 22 लाख रुपए के इनामी 10 माओवादियों सहित कुल 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये सभी नक्सली लंबे समय से पुलिस और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने में शामिल थे।

'लाल आतंक' छोड़कर समाज की ओर लौटे

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के समक्ष हथियार डाल दिए और कहा कि अब वे शांति, विकास और शिक्षा के रास्ते को अपनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली संगठन में लगातार आंतरिक कलह, शोषण, और विकास कार्यों से उपजी नई सोच ने उन्हें यह बड़ा निर्णय लेने पर मजबूर किया।

2 2लाख के इनामी नक्सली, देखें लिस्ट

इन 13 नक्सलियों में शामिल हैं – देवे मुचाकी उर्फ प्रमिला (21) – इनाम ₹8 लाख कोसा ओयाम उर्फ राजेन्द्र (29) – इनाम ₹5 लाख कोसी पोड़ियाम (27) – इनाम ₹2 लाख सम्मी सेमला (23) – ₹1 लाख छोटू परसीक (25) – ₹1 लाख मोती ताती (24) – ₹1 लाख सुनीता हेमला (23) – ₹1 लाख मंजुला कुंजाम (27) – ₹1 लाख सायबो पोड़ियाम (18) – ₹1 लाख हुंगी उण्डम उर्फ राधा (21) – ₹1 लाख तथा अन्य तीन नक्सली भी संगठन से जुड़े रहे।

विकास कार्यों ने बदली सोच

पुलिस अधिकारियों के अनुसार बीजापुर और आसपास के आंतरिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने इन माओवादियों को प्रभावित किया है। उनका संगठन से मोहभंग हुआ है और अब वे सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को मिला आर्थिक सहयोग सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन द्वारा ₹50,000 की सहायता राशि का चेक दिया गया है। ये सभी नक्सली अब शासकीय पुनर्वास नीति के अंतर्गत सरकारी योजना और निगरानी में रहेंगे।

आंकड़े जो चौंकाते हैं

2025 में अब तक बीजापुर जिले में 270 नक्सली गिरफ्तार 241 नक्सलियों ने सरेंडर किया 126 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति सफल हो रही है

क्यों छोड़ रहे हैं नक्सल संगठन?

हमें रोज मारा-पीटा जाता था, महिलाओं का शोषण होता था, हमारे लिए कोई भविष्य नहीं था…” – सरेंडर करने वाली महिला नक्सली प्रमिला ने कहा“शासन की पुनर्वास योजना ने हमें उम्मीद दी कि हम भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।”

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