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मुंबई ट्रेन ब्लास्टः हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
रिहा आरोपियों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा
2006 में मुंबई लोकल ट्रेन बम ब्लास्ट के तत्कालीन दोषियों 5 को मौत और 7 को उम्रकैद पर लगे आरोपों को Bombay High Court ने 21 जुलाई 2025 को 671 पृष्ठ की रिपोर्ताज में खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि "प्रोसीक्यूशन ने पूरी तरह फेल कर दी है"। लेकिन 24 जुलाई 2025 को Supreme Court ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर काल रोक लगा दी जंजीरें फिर से देखी जाएँगी; हालांकि अभी हाल में रिहा आरोपियों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा ।हाई कोर्ट पर SC का स्टे क्या कहा SC ने?
SC ने स्पष्ट किया, “निर्दोष रिहा” में जल्दबाजी न की जाए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा केस है, हर पहलू पर जांच ज़रूरी । कोर्ट ने कहा कि फुल फैसले की जांच के बाद ही आगे कदम होंगे।Devendra Fadnavis और राजनीति का तीखा रिएक्शन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाई कोर्ट के फैसले को “बहुत चौकाने वाला” बताया और कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी । राज्य की एडवाइज़री ली गयी, और ATS द्वारा दी गई सबूतों की समीक्षा शुरू की गई । BJP नेता किरित सोमैया और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले‑भुजबळ ने भी आरोप लगाया कि जांच में गंभीर चूक हैं शीघ्र SC में याचिका जायेगी ।हाई कोर्ट की चौंकाने वाली कमजोरियां
Bombay HC ने कई आधारों पर इन तथ्यों को आधार माना:
- बमों का प्रकार साबित नहीं हो सका
- गवाह ज्यादातर भरोसेमंद नहीं पहचान देर से हुई थी
- कथन जबरन कराया गया torture की आशंका
- Forensic evidence ठीक से सुरक्षित नहीं था; प्रमाण कमजोर थे राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और विपक्ष की नज़रिया
“justice delivery system की विफलता” कहा ।