सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को होगा फैसला!
चुनाव आयोग (EC) ने
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत बिहार के बाद अब पूरे देश में
वोटर लिस्ट की गहनता से जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाएगा और इसमें
गलत नामों,
अवैध प्रवासियों और
अन्य दोषों को हटाने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए
अगस्त 2025 से शुरुआत हो सकती है।
क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग द्वारा
वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें केवल
योग्य नागरिकों के नाम दर्ज हों। इस प्रक्रिया के तहत
वोटर लिस्ट में संशोधन और
अद्यतन किया जाता है ताकि चुनावों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो।
सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को सुनवाई
चुनाव आयोग का यह कदम तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने
10 जुलाई 2025 को बिहार में
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अनुमति दी थी। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर
विपक्षी दलों और कुछ नागरिकों ने आपत्ति जताई है और इसे
संविधान विरोधी बताया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान
योग्य नागरिक अपना
मताधिकार खो सकते हैं। इसलिए,
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की
आखिरी सुनवाई होगी, जिसके बाद
चुनाव आयोग इस पर अंतिम फैसला लेगा।
बिहार में विदेशी नागरिकों की पहचान
बिहार में वोटर लिस्ट
पुनरीक्षण के दौरान, चुनाव आयोग ने
नेपाल,
बांग्लादेश और
म्यांमार जैसे देशों के
अवैध प्रवासियों को
बड़ी संख्या में पाया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने
घर-घर जाकर इस जांच को किया, और जल्द ही
1 अगस्त 2025 के बाद
अवैध नागरिकों की पहचान की जाएगी। इन लोगों के नाम को
30 सितंबर 2025 को जारी होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा।
राज्यों में वोटर लिस्ट पब्लिश
कुछ राज्यों ने
पिछली SIR के बाद की
पब्लिश वोटर लिस्ट जारी कर दी है। उदाहरण के लिए,
दिल्ली की
2008 की वोटर लिस्ट और
उत्तराखंड की
2006 की वोटर लिस्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध है। इन सूची में
वोटर्स की सूची का पुनरीक्षण किया गया था और इसमें
अद्यतन किया गया है।
आखिरी तारीख और आगामी प्रक्रिया
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार,
वोटर लिस्ट के इस संशोधन और
गणना प्रक्रिया की
अंतिम तारीख 25 जुलाई 2025 है, जब सभी
गणना फॉर्म जमा हो जाएंगे। इसके बाद 30 सितंबर 2025 को अंतिम वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी।
इस
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव आयोग
नागरिकों के मताधिकार को सुनिश्चित करना चाहता है और
मतदाता सूची को पारदर्शी और
सुनिश्चित बनाना चाहता है, जिससे भविष्य में चुनावों में किसी भी प्रकार की
धोखाधड़ी की संभावना कम हो।
क्या यह कदम चुनावों में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा?
यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और
मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन क्या यह
संविधान और नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करेगा, यह
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की
सुनवाई में तय होगा।
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