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हलहारिणी अमावस्या: पूजा-रतिवाली से लेकर पेड़-पौधे की परंपरा तक सब कुछ जानिए!

halharini amavasya june: आषाढ़ अमावस्या 25 जून, हलहारिणी पूजा तथा पौधा रोपण की परंपरा

 halharini amavasya june: 25 जून 2025 को आषाढ़ मास की अमावस्या यानी नरसिंह चतुर्दशी से पहले की यह महाशिवपूर्ण अमावस्या—हलहारिणी अमावस्या मनाई जाती है खास कर किसानों के लिए यह दिन कृषि और पर्यावरण के लिहाज़ से बेहद शुभ माना जाता है।

1️⃣ महत्व: हल और कृषि उपकरण की पूजा

  • इस दिन किसान हल, कुदाल, खुरपी जैसे कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं, क्योंकि हल से खेत जोते जाते हैं और बीज बोए जाते हैं।
  • इसे वर्षा ऋतु की शुरुआत माना जाता है—फसल की बुवाई के लिए इसे आदर्श समय बताया जाता है।

2️⃣ क्या करें इस दिन: पूजा विधि

  1. सूर्योदय सामरिक आरंभ – आरंभ करें सूर्य को तांबे के लोटे में जल लेकर “ॐ सूर्याय नम:” मंत्र उच्चारित कर अर्घ्य देकर।
  2. देवी-देवताओं की अभिषेक पूजा – घर के मंदिर में गणेश, शिव, पार्वती, श्रीकृष्ण आदि की विधिपूर्ण पूजा करें।
  3. पितृ तर्पण एवं श्राद्ध – दोपहर में गाय के गोबर से कंडे जलाकर, श्राद्ध, तर्पण (पानी चढ़ाना) और दान करें।
  4. पवित्र स्नान – नदी में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करके तन और मन को शुद्ध करें।
  5. हनुमान या शिव आराधना – हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं, चालीसा का पाठ करें; या शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और ऊँ नमः शिवाय का जप करें।
  6. दान – जरूरतमंदों को दान, विशेषकर जूते-चप्पल, अनाज, भोजन आदि दे कर पुण्य अर्जित करें।
  7. तुलसी पूजा – अमावस्या की शाम तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें—वृक्ष देवता का आशीर्वाद प्राप्त करें।
  8. शिवलिंग अभिषेक – विधिपूर्वक अभिषेक करें: जल, दूध, दही, घी, शमी-पत्र, चंदन आदि चढ़ाएं, अंत में भोग लगाकर आरती करें।

? पौधा रोपण: प्रकृति के साथ आराधना

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि इस दिन छायादार एवं सार्वजनिक स्थानों में पौधा लगाने का विशेष महत्व है। – पौधा लगाते समय संकल्प करें कि उसकी रक्षा व संरक्षण करेंगे, जिससे प्रकृति के साथ आपकी आस्था भी मजबूत होगी।

? क्यों है यह दिन शुभ?

  • आषाढ़ अमावस्या पर पितृ तर्पण और दान उद्देश्यपूण होता है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पितरों को तृप्त करता है
  • यह दिन यातायात, मिट्टी और बीज के माध्यम से नये जीवन का सूत्रपात करता है—खेती की सफलता का प्रतीक माना गया है।

? मुहूर्त: कब करें?

अमावस्या तिथि 25 जून दोपहर 4:02 बजे तक है। – सुबह 11:30–12:30 और दोपहर शुरुआती 2 बजे से पहले शुभकाल का उपयोग करें। – समयानुसार स्नान, पूजा और पौधा रोपण का आयोजन करना चाहिए।

✅ संक्षिप्त विधि सारांश

चरण कार्य
? सुबह सूर्य अर्घ्य + देवी-देवता पूजा
? दोपहर पितृ तर्पण + दान
? स्नान नदी या गंगाजल से स्नान
? शाम तुलसी पूजा + दीप जलाना
? पौधा सार्वजनिक स्थान में पौधा रोपना

? परिवार, प्रकृति और आत्मा को जोड़ने का अवसर

हलहारिणी अमावस्या कृषि और जीवन के मेल का उत्सव है—जहां किसान अपने खेतों के साथ, हम अपने चारों ओर प्राकृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करते हैं। यह दिन परिवार, प्रकृति और आत्मा को जोड़ने का अवसर लेकर आता है। आज ही इसे अपनाएं—पूजा करें, पौधा लगाएं, और नए जीवन की राह खोलें!

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