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CG Weather: छत्तीसगढ़ में बारिश का यलो अलर्ट

chhattisgarh weather alert: रायपुर समेत 33 जिलों में बारिश का दौर

chhattisgarh weather alert: छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। रायपुर समेत 11 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं बाकी जिलों में बादल छाए रहने के साथ कहीं-कहीं गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।खास तौर से बस्तर और सरगुजा संभाग के लिए चेतावनी जारी की गई है। यहां 30-40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना है। इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कहां-कितनी बारिश, कितनी कमी?

राज्य में सामान्य से 24% कम बारिश

1 जून से 27 जून 2025 तक प्रदेश में कुल 122.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि इस अवधि तक सामान्य बारिश का आंकड़ा 160.9 मिमी होना चाहिए था। यानी अब तक 24% कम बारिश हुई है।

बलरामपुर में सबसे अधिक बारिश दर्ज हुई है। यहां अब तक 245.7 मिमी पानी बरस चुका है, जो सामान्य (114 मिमी) से 115.5% ज्यादा है।

राजनांदगांव में सबसे कम बारिश हुई है। यहां सिर्फ 31.8 मिमी बारिश हुई जबकि सामान्य 159.9 मिमी होती है। यानी 80% कमी दर्ज की गई। सुकमा में भी बारिश में 69% की कमी है। यहां अब तक सिर्फ 69 मिमी बारिश हुई जबकि सामान्य 181 मिमी होती है।

प्रदेश के आंकड़े

1 जिला सामान्य से बहुत अधिक बारिश वाला। 3 जिले सामान्य से अधिक बारिश वाले। 8 जिले सामान्य बारिश वाले। 19 जिले सामान्य से कम बारिश वाले। 2 जिले बहुत कम बारिश वाले।

तापमान भी इस साल रहा कम

इस साल जून में पिछले साल की तुलना में तापमान कम रहा। 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था। इस साल अधिकतम तापमान 42-43°C के बीच रहा। न्यूनतम तापमान भी घटकर 19.7°C (पेंड्रारोड) तक पहुंचा है। पिछले साल जून का औसत अधिकतम तापमान 38.6°C और न्यूनतम 27.7°C था।

मानसून रहेगा लंबा?

मानसून इस साल 24 मई को ही केरल पहुंच गया, जो सामान्य से 8 दिन पहले है। लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर मानी जाती है। यदि मानसून समय पर लौटता है, तो इसकी अवधि 145 दिन रहेगी।विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून ब्रेक न होने पर जल्दी पहुंचने का फायदा प्रदेश को मिल सकता है और बारिश की कमी की भरपाई भी संभव है। क्यों गिरती है आकाशीय बिजली? जानिए जरूरी बातें आकाशीय बिजली दरअसल विपरीत चार्ज वाले बादलों के टकराव और घर्षण से बनती है। बादलों के बीच चार्ज का संतुलन बिगड़ता है और यह चार्ज धरती पर गिरता है। आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता करीब 12.5 करोड़ वॉट तक होती है। बिजली गिरने की सबसे ज्यादा आशंका दोपहर के समय होती है। इंसान के सिर, गले और कंधों को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।

आकाशीय बिजली से जुड़े मिथक

 एक ही जगह पर दो बार बिजली नहीं गिरती। (हकीकत: गिर सकती है।)
 रबर, टायर या फोम बिजली से बचाते हैं।
नाव में बैठा इंसान सुरक्षित रहता है।
लंबी चीजें जैसे पेड़ या टावर बिजली से बचाती हैं।

सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है।

लोगों के लिए सुझाव

खराब मौसम में घर से बाहर न निकलें। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग कम करें। पेड़, बिजली के खंभों से दूर रहें। बिजली चमकते वक्त ऊंचाई पर खड़े न हों।

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