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2008 मालेगांव ब्लास्ट केस: साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपी बरी

मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला  

मुंबई: महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुए बम विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह तो साबित कर पाया कि मालेगांव में विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि विस्फोटक सामग्री उस मोटरसाइकिल में रखी गई थी, जिसका इस्तेमाल बम को स्थानांतरित करने के लिए किया गया था।

17 साल बाद आया फैसला

मालेगांव ब्लास्ट मामले में फैसला 17 साल बाद आया। अदालत ने 19 अप्रैल को सुनवाई समाप्त करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, और अब 31 जुलाई 2025 को यह ऐतिहासिक निर्णय आया। यह फैसला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है, जिसमें एक लाख से अधिक पृष्ठों का दस्तावेजी सबूत और 323 गवाहों की गवाही शामिल थी।

आरोपियों की पहचान और कानूनी दांवपेंच

इस मामले में कुल सात आरोपी थे, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय शामिल थे। आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। सभी आरोपी इस वक्त जमानत पर बाहर हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विस्फोट 29 सितंबर 2008 को हुआ था, जब मालेगांव में रमजान के पवित्र महीने और नवरात्रि के ठीक पहले सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में विस्फोट हुआ था। इस विस्फोट में छह लोगों की जान चली गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। प्रारंभ में इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने की थी, लेकिन 2011 में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया था।

गवाहों और साक्ष्यों पर सवाल

मामले में गवाहों की संख्या बहुत बड़ी थी। अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की थी, जिनमें से 34 गवाहों ने अपने बयान से मुकर गए थे। इसके अलावा, 40 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी रद्द किए गए थे, और 40 गवाहों की हत्या हो चुकी थी। इस सभी असंगतियों और विवादों के कारण अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया।

कानूनी और राजनीतिक परिणाम

एनआईए कोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी इसका गहरा असर हो सकता है। मालेगांव ब्लास्ट को लेकर कई राजनीतिक बहसें चल चुकी थीं, और यह फैसला उन सभी को प्रभावित करेगा।

वकील का बयान

इस फैसले पर आरोपी सुधाकर धर द्विवेदी के वकील रंजीत सांगले ने कहा, "17 साल की लंबी देरी के बाद, हमें न्याय मिला है। 323 गवाहों के बयानों, 40 गवाहों के पलटने और 40 अन्य गवाहों की मृत्यु के बाद आज अदालत ने न्याय किया। हमारे खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे, और सभी आरोपी बरी हो गए हैं।"

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