देश-विदेश
तीसरा विश्व युद्ध नज़दीक : रूस-अमेरिका तनाव और परमाणु हथियार सबसे बड़े खतरे
? सर्वे में 55% लोगों ने जताई आशंका, क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है?
हालिया ग्लोबल सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—अमेरिका और यूरोप के 55% लोग मानते हैं कि अगले 5-10 सालों में तीसरा विश्व युद्ध संभव है। इस युद्ध की सबसे बड़ी वजह रूस और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव और परमाणु हथियारों की दौड़ मानी जा रही है।? 80 साल बाद फिर जगी युद्ध की आशंका
1945 में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ था, लेकिन यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व की उठापटक और रूस की आक्रामक नीतियों ने एक बार फिर दुनिया को युद्ध की तरफ धकेल दिया है। सर्वे एजेंसी YouGov के अनुसार, पश्चिमी देशों में 76% लोग मानते हैं कि अगला विश्व युद्ध परमाणु होगा और यह पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा।? अपनी सेना पर भरोसा नहीं?
बड़े चौंकाने वाली बात ये रही कि कई यूरोपीय देशों के नागरिकों को अपनी सेनाओं की क्षमता पर भरोसा नहीं है। बढ़ते खतरे के बीच जब अपनी ही सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा डगमगाने लगे, तो चिंता जायज़ है।? रूस, आतंकवाद और अमेरिका की विदेश नीति – सबसे बड़े खतरे
सर्वे में सामने आए टॉप तीन खतरे:- ?? रूस का बढ़ता सैन्य दखल और परमाणु धमकी (82% पश्चिमी यूरोपीय और 69% अमेरिकी नागरिकों के अनुसार)
- ☢️ परमाणु हथियारों का वैश्विक फैलाव
- ? इस्लामिक आतंकवाद – अभी भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है
? इतिहास से सबक लेने की ज़रूरत
90% लोगों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध की जानकारी स्कूलों में अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में लोगों को WWII की जानकारी बेहतर है, जबकि स्पेन जैसे देशों में जागरूकता कम पाई गई।? क्या फिर लौट सकता है नाजी जैसा दौर?
- 52% लोगों को लगता है कि दुनिया में फिर से नाजी शासन जैसी तानाशाही लौट सकती है।
- 60% को डर है कि अमेरिका और यूरोप में भी फासीवादी मानसिकता पनप सकती है।
? कौन कर रहा है शांति की रक्षा?
जब लोगों से पूछा गया कि कौन सी संस्थाएं वर्ल्ड वॉर के बाद शांति बनाए रखने में सबसे ज्यादा कारगर रहीं, तो ये जवाब सामने आए:| संस्था | लोगों का विश्वास |
|---|---|
| NATO | 66% |
| United Nations | 60% |
| European Union | 56% |
?? जर्मनी में क्या सोचते हैं लोग?
- 47% जर्मन नागरिक मानते हैं कि पहली सरकारें नाजी इतिहास को लेकर ज्यादा सतर्क थीं।
- लेकिन मौजूदा सरकार अंतरराष्ट्रीय संकटों में उचित कदम उठाने में कमजोर रही है।