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धराली का दर्द: 34 सेकेंड में उजड़ा पूरा गांव, अब कभी नहीं बसेगा!
धराली: 34 सेकेंड में सब कुछ मिट गया
कभी कभी ज़िंदगी एक पल में सब कुछ बदल देती है। मैंने बचपन में सुना था कि पहाड़ों में प्रकृति जितनी सुंदर है, उतनी ही कठोर भी। पर जब धराली की कहानी सुनी, तो लगा कि ये सिर्फ कोई किस्सा नहीं, ये तो एक चीखती हुई सच्चाई है जो हर बार अनसुनी रह जाती है। 5 अगस्त 2025 की दोपहर थी। उत्तरकाशी का शांत सा लगने वाला धराली गांव अपने रोज़ के कामकाज में था। लोग दुकानें खोल रहे थे, बच्चे खेल रहे थे, कहीं किसी घर में पकौड़े बन रहे होंगे शायद। और तभी... आकाश फट गया। ना कोई चेतावनी, ना कोई मौका। महज 34 सेकेंड में पूरा गांव खीरगंगा नदी की बाढ़ में बह गया। वो ज़मीन, जहां पीढ़ियों ने अपना खून पसीना बहाया था अब सिर्फ मलबा बनकर रह गई।एक गांव की कहानी नहीं, हर खोए चेहरे की चीख है
राकेश, गोंडा से आया ठेकेदार, उस दिन पास के होटल में खाना खा रहा था। उसके 14 लोगों की टीम पास के प्रगति होटल में वेल्डिंग कर रही थी। 14 में से 10 की लाशें मिल गईं, 4 अभी भी लापता हैं। राकेश का गला रुँध जाता हैकाश मैं उन्हें भी खींच लाता, बस कुछ सेकेंड और मिल जाते।जयदेव पंवार का परिवार तो जैसे किस्मत से बच गया। वो समेश्वर मंदिर में थे। पर गांव लौटे तो देखा 8 लोग मिट्टी में दब चुके हैं, जिनमें एक बच्ची भी थी। सिर्फ एक शव मिला। बाकी? मलबे के नीचे कहीं चुपचाप।