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उज्ज्वल निकम राज्यसभा: PM मोदी ने किया फोन, बोले- हिंदी या मराठी?"

पीएम मोदी ने खुद फोन कर दी जानकारी: उज्ज्वल निकम से बोले- "हिंदी में बात करें या मराठी में?"

उज्ज्वल निकम राज्यसभा: आतंकवादियों को सज़ा दिलाने वाले वकील को मिला संसद का सम्मान

उज्ज्वल निकम राज्यसभा: मशहूर और बहादुर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम को अब संसद में नई जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया है। लेकिन इस ऐलान से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन कर यह जानकारी दी।

दिलचस्प बात ये रही कि पीएम मोदी ने बात की शुरुआत बड़े ही अनोखे अंदाज में की। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा—"हिंदी में बात करें या मराठी में?" इसपर दोनों ही हंस पड़े, फिर बातचीत मराठी में ही हुई।

 ‘आपको राज्यसभा के लिए नामित किया गया है’ – पीएम मोदी की खास बातचीत

उज्ज्वल निकम राज्यसभा: उज्ज्वल निकम ने खुद बताया, “शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। उन्होंने बेहद आत्मीयता से बात की और मराठी में कहा कि मुझे एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। फिर उन्होंने बताया कि मुझे राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया है।”

निकम ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया और कहा कि यह मेरे जीवन का गौरवपूर्ण क्षण है।

उज्ज्वल निकम – आतंकवाद के खिलाफ देश की आवाज

आपको बता दें कि उज्ज्वल निकम का नाम लेते ही याद आता है 26/11 मुंबई आतंकी हमला, जिसमें उन्होंने मुख्य सरकारी वकील के तौर पर अजमल कसाब को सज़ा दिलवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा:

  • 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में भी वे सरकारी वकील थे।

  • गुलशन कुमार मर्डर केस, बीजेपी नेता प्रमोद महाजन हत्याकांड, जैसे हाई प्रोफाइल मामलों में उन्होंने कोर्ट में सरकार की ओर से केस लड़ा।

  • साल 2016 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था।

उज्ज्वल निकम राज्यसभा: पीएम मोदी का सराहना भरा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,

"श्री उज्ज्वल निकम का कानूनी क्षेत्र और हमारे संविधान के प्रति समर्पण अनुकरणीय है। उन्होंने हमेशा संवैधानिक मूल्यों को मज़बूत किया और आम नागरिकों को न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई।"

पीएम ने यह भी जोड़ा कि "राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए उनका नामांकन अत्यंत प्रशंसनीय है। मेरी शुभकामनाएं उनके संसदीय जीवन के लिए।"

उज्ज्वल निकम का राज्यसभा में आना सिर्फ एक नामांकन नहीं, बल्कि देश की न्यायिक व्यवस्था के प्रतीक को संविधान की सबसे बड़ी पंचायत में शामिल करना है। यह युवाओं को भी संदेश है कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और देशभक्ति का हमेशा सम्मान होता है।